बास्केटबॉल खिलाड़ी पी जॉनी राव हत्याकांड: पत्नी डॉली को अजीवन कारावास की सजा

Updated at : 10 Aug 2023 12:10 PM (IST)
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बास्केटबॉल खिलाड़ी पी जॉनी राव हत्याकांड: पत्नी डॉली को अजीवन कारावास की सजा

हाइकोर्ट ने रवि चौरसिया, मो अख्तर, सतपाल सिंह उर्फ मिठु और पप्पू झा उर्फ सुशील झा को साक्ष्याभव में बरी कर दिया है. सीतारामडेरा थाना अंतर्गत न्यू ले आउट में 17 जून, 2003 को गोली मार कर टिस्कोकर्मी व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पी जॉनी राव की हत्या कर दी गयी थी.

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संजीव भारद्वाज, जमशेदपुर :

अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी पी जॉनी राव हत्याकांड में झारखंड हाइकोर्ट के न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और अनुभवा रावत चौधरी की अदालत ने 18 साल बाद जमशेदपुर की निचली अदालत का फैसला पलटते हुए बुधवार को आरोपी और पी जॉनी राव की पत्नी पी छंदा राव उर्फ डॉली, मोहन गुप्ता (अभी तक फरार), शिवनारायण यादव उर्फ छोटका (मृत) और राजू पोंडवाल (मृत), को आजीवन कारावास की सजा सुनायी है.

मामले में हाइकोर्ट ने रवि चौरसिया, मो अख्तर, सतपाल सिंह उर्फ मिठु और पप्पू झा उर्फ सुशील झा को साक्ष्याभव में बरी कर दिया है. सीतारामडेरा थाना अंतर्गत न्यू ले आउट में 17 जून, 2003 को गोली मार कर टिस्कोकर्मी व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी पी जॉनी राव की हत्या कर दी गयी थी. मामले में पी जॉनी राव के पिता के बयान पर आठ आरोपियों (पत्नी पी छंदा राव उर्फ डॉली, छोटका, राजू पोंडवाल, मोहन गुप्ता, रवि चौरसिया, मो अख्तर, सतपाल सिंह उर्फ मिठु और पप्पू झा उर्फ सुशील झा) के खिलाफ गोली मार कर हत्या करने, साजिश रचने, अवैध हथियार रखने समेत अन्य कई धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया था.

जमशेदपुर की अदालत में जिला पुलिस अवैध हथियार रखने के मामले में कोई साक्ष्य नहीं प्रस्तुत कर पायी, जिसके कारण मामले में आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया गया. इसके बाद साजिश रचने और हत्या करने के मामले में आरोपी बनाये गये अभियुक्तों के खिलाफ किसी तरह का साक्ष्य नहीं प्रस्तुत करने पर 2005 में सभी को बरी कर दिया.

जिला अदालत के इस फैसले के खिलाफ हाइकोर्ट में सरकार की ओर से चुनौती दी गयी. झारखंड हाइकोर्ट में 8 मई 2006 को केस एडमिट कर लिया गया. झारखंड हाइकोर्ट में मामले की सुनवाई 7 और 8 अगस्त को लगातार हुई, जिसके बाद नौ अगस्त को इन चार आरोपियों को अाजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी.

27 जुलाई 2023 को मामले में बहस हुई थी पूरी

झारखंड हाइकोर्ट में सरकार की ओर से अधिवक्ता वंदना ने बहस की. उन्होंने 27 जुलाई 2023 को इस मामले में अपनी बहस पूरी की, जबकि अलग-अलग आरोपियों की ओर से अधिवक्ता नवीन कुमार जायसवाल, एमए नियाजी, एके चौहान और प्रिंस कुमार ने 27 जुलाई को और रवि चौरसिया की तरफ से अधिवक्ता अयूब अंसारी ने सात अगस्त को जिरह की. आरोपियों की स्वीकारोक्ति बयान में काफी बातें सामने आयी थी, जो मामले में हाइकोर्ट में सजा का आधार बनी.

इस मामले में आरोपी राजू पोंडवाल मुख्य शूटर था, को अाजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी, साजिशकर्ता पी छंदा राव उर्फ डॉली, मोहन गुप्ता बरी होने के बाद से मामले में फरार हैं. छोटका यादव उर्फ शिवनाथ यादव (मौत) को दोषी मानते हुए सजा सुनायी गयी. अधिवक्ता अयूब अंसारी ने बताया कि अब इस मामले में आरोपियों के पास सुप्रीम कोर्ट जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है. हाइकोर्ट के फैसले की कॉपी जमशेदपुर के संबंधित पेडिंग कोर्ट को जल्द मिल जायेगी. इसके बाद अाजीवन कारावास की सजा पानेवाले सभी आरोपियों के खिलाफ कोरसिप स्टेप लिया जायेगा और संबंधित थाना को गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिया जायेगा. जबकि अन्य आरोपियों के बंध पत्र रद्द कर दिये जायेंगे.

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