जुबिली पार्क की जयंती सरोवर मछलियों के रहने लायक नहीं पानी के साथ तालाब की मिट्टी भी है प्रदूषित

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 01 Jul 2023 11:59 AM

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रांची स्थित शालिमार मत्स्य अनुसंधान केंद्र की जांच रिपोर्ट में कुल आठ मापदंड में से अधिकांश में यह सरोवर मछलियों के लिए प्रतिकूल पाया गया.

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जुबिली पार्क स्थित जयंती सरोवर में मछलियों की मौत को लेकर करायी गयी जांच की रिपोर्ट आ गयी है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तालाब की मिट्टी काफी दूषित है. पानी भी काफी दूषित था. इसमें अमोनिया की मात्रा काफी अधिक थी. मछलियों की मौत के बाद मत्स्य विभाग की टीम की ओर से पानी और मिट्टी के अलग-अलग नमूने जांच के लिए भेजे गये थे.

रांची स्थित शालिमार मत्स्य अनुसंधान केंद्र की जांच रिपोर्ट में कुल आठ मापदंड में से अधिकांश में यह सरोवर मछलियों के लिए प्रतिकूल पाया गया. तालाब के रख रखाव के संबंध में टाटा स्टील यूआइएसएल (पहले जुस्को) को अहम सुझाव दिये गये हैं.विभाग की ओर से जांच रिपोर्ट टाटा स्टील को भेजी गयी है.

ये दिये गये हैं सुझाव :

तालाब में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने लिए वाटर एक्सचेंज करने को कहा गया है. शाम के समय वाटर पंप का प्रयोग अथवा 02 मैक्ट टैबलेट, 2 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से एवं टॉक्सीमर 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करने का सुझाव दिया गया है. टॉक्सीमर के स्थान पर जूलाइट भी प्रयोग में लाया जा सकता है. पानी में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए अमोनिया की विषाक्तता को कम करने को कहा गया है. जांच टीम ने स्थिति में सुधार होने तक मछलियों को खाना नहीं देने की सलाह भी दी है.

ये था पूरा मामला :

पिछले दिनों मछलियों की हुई मौत के मामले की जांच के आदेश दिये गये थे. निदेशक मत्स्य विभाग ने मामले के जांच के आदेश दिये थे. 19 जून को एक टीम आयी थी, जिन्होंने पूरे मामले की जांच की थी. रांची स्थित शालिमार प्रयोगशाला में इसकी जांच की गयी थी. टीम में मत्स्य प्रसार पदाधिकारी (एफइओ) रणविजय कुमार, मत्स्य प्रसार पर्यवेक्षक सावन शीला हांसदा तथा दो लैब टेक्नीशियन शामिल थे.

जांच रिपोर्ट में सामने आये तथ्य

तालाब के पानी का रंग हरा है. ऐसा ऑर्गेनिक लोड (जैविक भार) एवं फाइटोप्लैंकटॉन (पादक पल्वक) की मात्रा अधिक होने के कारण होती है.

तालाब की मिट्टी का रंग काला पाया, जो ऑर्गेनिक मैटर की मात्रा अधिक होने के कारण होती है. पानी और गाद का दो-दो सैंपल लिया गया था.

तालाब का वाटर क्वालिटी पैरामीटर के तहत तापमान 26-32 डिग्री सेल्सियस के बीच होना चाहिए, एक जांच में 37.6 तथा दूसरी जांच में 34.4 डिग्री सेल्सियस पाया गया.

पानी में ऑक्सीजन की मात्रा 4 पीपीएम से अधिक होनी चाहिए, दोनों सैंपल की जांच में ऑक्सीजन की मात्रा इसके बराबर पायी गयी.

पानी में कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा 15 पीपीएम से ज्यादा 20 से 24 पीपीएम पायी गयी

पानी का पीएच मानक 7.3 से 8.5 के बीच है, सराेवर के पानी का पीएच 8.6 पाया गया. अल्कलाइनिटी की मात्रा 60-200 पीपीएम होनी चाहिए, 225 पीपीएम पाया गया.

पानी में अमोनिया की मात्रा 0.5 पीपीएम से कम होनी चाहिए. जांच में यह 4.0 पीपीएम पाया गया. नाइट्राइट 0.1 पीपीएम की जगह 0.25 पीपीएम पाया गया.

नाइट्रेट 5.0 पीपीएम से कम होना चाहिए. यह 0 पीपीएम पाया गया

जयंती सरोवर में मछलियों की मौत क मामले में विभाग की ओर से करायी गयी जांच से जुड़ी सारी रिपोर्ट प्राप्त हो गयी है. स्थिति में सुधार के लिए टाटा स्टील यूआइएसएल (पहले जुस्को) को रिपोर्ट मुहैया करा दी गयी है. कुछ अहम सुझाव भी दिये गये हैं.

अल्का पन्ना, जिला मत्स्य पदाधिकारी, पूर्वी सिंहभूम

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