jamshedpur news : स्टेट बार काउंसिल से मान्यता हासिल करनेवाला पहला संगठन बना सीटीबीए जमशेदपुर

Published by : AKHILESH KUMAR Updated At : 11 Jan 2026 12:28 AM

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जमशेदपुर (फाइल फोटो)

सीटीबीए में निबंधित अधिवक्ता के निधन पर परिवार को मिलेगी आर्थिक सहायता

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सीटीबीए में निबंधित अधिवक्ता के निधन पर परिवार को मिलेगी आर्थिक सहायता

अधिवक्ताओं को रिटायरमेंट पेंशन, बीमा संबंधी सुविधा का भी लाभ मिलेगा

jamshedpur news :

स्टेट बार काउंसिल, झारखंड ने कॉमर्शियल टैक्स बार एसोसिएशन (सीटीबीए) जमशेदपुर को मान्यता प्रदान कर दी है. अब सीटीबीए के सदस्य स्टेट बार काउंसिल के चुनाव में प्रत्यक्ष रूप में हिस्सा लेंगे. सीटीबीए में निबंधित अधिवक्ता के निधन पर उनके परिवार को साढ़े तीन लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी. इसके अलावा अधिवक्ता रिटायरमेंट पेंशन पाने के अधिकारी होंगे, साथ ही वे झारखंड सरकार द्वारा प्रदत्त बीमा का भी लाभ उठा पाएंगे. सीटीबीए जमशेदपुर राज्य का पहला संगठन होगा, जिसे स्टेट बार काउंसिल ने मान्यता-संबद्धता प्रदान की है. मान्यता मिलने की खुशी में पुराना कोर्ट परिसर स्थित सीटीबीए के बार भवन में मिलन समारोह सह लिट्टी पार्टी का आयोजन किया गया. इस अवसर पर एडिशनल कमिश्नर अवधेश कुमार मेहरा, संयुक्त आयुक्त सुनील कुमार चौधरी, सहायक आयुक्त विनय शंकर, श्रवण कुमार प्रजापति, चेंबर के अध्यक्ष मानव केडिया के अलावा सीटीबीए अध्यक्ष बासुदेव चटर्जी, महासचिव दिलीप कुमार, सह चेयरमैन खजांची लाल मित्तल, सतीश सिंह, जितेंद्र कुमार, अंजन भट्टाचार्य, राजेश अग्रवाल, आरजी प्रसाद, संजय सेन, अरुण कुमार, मालविका दास महापात्रा, चंदन केडिया, राहुल कुमार, राहुल आनंद, आफताब आलम खान, हेमंत साहू, राघवेंद्र उपाध्याय समेत काफी संख्या में अधिवक्ता उपस्थित थे.

सीटीबीए के महासचिव दिलीप कुमार ने बताया कि अधिवक्ताओं को एडवोकेट वेलफेयर ट्रस्टी कमेटी में अपना निबंधन कराना होगा, जिसके बाद वे इस संगठन के लाभार्थी बन पाएंगे. अधिवक्ता सीटीबीए या फिर बार न्यायालय, किसी एक जगह ही सदस्यता ले पायेंगे. बिहार के समय में सीटीबीए का निबंधन था, लेकिन झारखंड बनने के बाद यह पहल नहीं हुई. जब इसकी शुरुआत हुई तो स्थानीय बार एसोसिएशन जमशेदपुर से मदद नहीं मिली. इसके बाद उन्होंने स्टेट बार काउंसिल से मान्यता की मांग की, वहां से जब कोई जवाब नहीं मिला तो उन्होंने हाइकोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया. छह साल के बाद उनके पक्ष में फैसला आया, जिसके बाद मान्यता स्टेट बार काउंसिल ने उन्हें प्रदान की. मान्यता के बाद अब जल्द ही सभी के निबंधन कार्य किया जायेगा. सबसे पहले अधिवक्ताओं के 70-80 मामलों का निष्पादन किया जायेगा.

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