जमशेदपुर के मुशायरों में दो बार गूंजा था बशीर बद्र का कलाम

Published by : SANJAY PRASAD Updated At : 29 May 2026 12:54 AM

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पांच अप्रैल 1982 को करीम सिटी कॉलेज में आयोजित सेमिनार व मुशायरे में बशीर बद्र जमशेदपुर आये थे.

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स्मृति शेष

jamshedpur. प्रसिद्ध उर्दू शायर बशीर बद्र का गुरुवार को निधन हो गया. वे 91 वर्ष के थे. अभी उजाला भरपूर था लेकिन जिंदगी की शाम हो गयी. वे अपनी यादों का उजाला छोड़कर इस जहान-ए-फानी को अलविदा कह गये. उनकी गजलों और शेरों में मुहब्बत और जिंदगी के अफसाने थे. साथ ही अपनी गजल के जरिये उन्होंने सामाजिक मुद्दों को भी खूबसूरती से पेश किया. उनका जमशेदपुर से भी नाता रहा. उन्होंने ने यहां दो बार मुशायरे में शिरकत की थी.

रोड नंबर 18, जवाहरनगर निवासी असलम बद्र बताते हैं कि वे एक बार रीगल मैदान के मुशायरे में आये थे. और दूसरी बार करीम सिटी कॉलेज के मुशायरे में शिरकत की थी. करीम सिटी वाला मुशायरा काफी बड़ा था. जिसमें देश के कई बड़े शायर आये थे. असलम बताते हैं कि दोनों ही मुशायरे में बशीर को देखने-सुनने का मौका मिला. शहर के बाहर भी कई मुशायरे में उन्हें सुनने का अवसर मिला. एक सफर में तो दोनों साथ ही थे. जबलपुर से सियोनी के मुशायरे में वे लोग बस से साथ गये थे.

1982 में बशीर बद्र करीम सिटी कॉलेज में पेश किया था गजल

करीम सिटी कॉलेज के उर्दू विभाग के प्राध्यापक अहमद बद्र भी बताते हैं कि पांच अप्रैल 1982 को करीम सिटी कॉलेज में आयोजित सेमिनार व मुशायरे में बशीर बद्र जमशेदपुर आये थे. इस मुशायरे में अन्य शायर थे कैफ भोपाली, वसीम बरेलवी, मुजफ्फर हनफी आदि. इस मुशायरे में बशीर बद्र ने जो गजल पढ़ी वह इस प्रकार है, जिंदगी हम फकीरों से क्या ले गयी/ सर से चादर बदन से क़बा ले गयी/ मेरी मुट्ठी में सूखे हुए फूल थे/ खुशबुओं को उड़ा कर हवा ले गयी.

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