जमशेदपुर में लंगूर ने फिर मचाया हंगामा, हमले में 2 वनकर्मी घायल, कई रेल यात्रियों को भी लगी चोट

रेलवे स्टेशन पर आराम से बैठा लंगूर. प्रभात खबर
जमशेदपुर में रामनवमी के दिन लंगूर ने फिर से हंगामा मचा दिया. टाटानगर रेलवे स्टेशन पर 3 घंटे अफरा-तफरी मची रही. 2 वनकर्मी हमले में घायल हो गए.
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रामनवमी के दिन बुधवार (17 अप्रैल) को टाटानगर रेलवे स्टेशन पर फिर से लंगूर के पहुंचने से पूरे स्टेशन परिसर में हड़कंप मच गया. लगभग 3 घंटे तक लंगूर ने स्टेशन पर जमकर उत्पात मचाया. इस दौरान अफरातफरी मची रही.
टाटानगर रेलवे स्टेशन पर ऐसे हुई लंगूर को पकड़ने की कोशिश
सूचना मिलने पर पहुंचे वनकर्मियों ने पहले तो स्टेशन के बाहर एक पिंजड़ा लगाया. उसमें केला लगाया, ताकि लंगूर पहुंचे और उसको पकड़ा जा सके, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके बाद वनकर्मियों ने रेलकर्मियों की मदद से लंगूर को पकड़ने की कोशिश की.
लंगूर ने वनरक्षियों पर कर दिया हमला, 2 लोग घायल
इस दौरान लंगूर ने दो वनरक्षियों पर हमला कर दिया, जिससे दोनों घायल हो गये. दोपहर लगभग दो बजे से शाम पांच बजे तक लंगूर स्टेशन परिसर में उत्पात मचाता रहा. इस दौरान स्टेशन के स्टॉल में घूम-घूम कर खाने का सामान फेंकता और खाता रहा. इसके बाद चला गया.
- स्टेशन पर मची अफरा-तफरी में कई यात्रियों को लगी चोट
- वन कर्मियों ने पिंजड़ा लगाकर पकड़ने की कोशिश की
स्टेशन परिसर में अफरा-तफरी, कई यात्री हुए चोटिल
स्टेशन परिसर में मची अफरा-तफरी के कारण कई यात्रियों को भी चोटें आयीं. कई यात्रियों ने लंगूर को ब्रेड और केला खिला कर शांत करने की कोशिश की. पहले लंगूर प्लेटफार्म नंबर 1 पर पहुंचा.

पानी पीने के बाद पेड़ पर चढ़कर बाहर निकल गया लंगूर
इसके बाद अन्य प्लेटफार्म पर पहुंचकर उत्पात मचाया. वह नये फुटओवरब्रिज से होकर सेकेंड इंट्री गेट पहुंचा और वहां महिला सुलभ शौचालय के पास पानी पीने लगा. फिर पेड़ पर चढ़ते हुए आगे निकल गया.

जाली लगाकर बैठे रहे वनकर्मी, पकड़ में नहीं आया लंगूर
लंगूर को पकड़ने के लिए रेलवे और वन विभाग के कर्मचारी जाली लगाकर बैठे रहे, लेकिन वह उनकी पकड़ में नहीं आया. 15 दिनों में लंगूर दूसरी बार स्टेशन परिसर में पहुंचा. उस दौरान भी वह पकड़ा नहीं जा सका था.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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