अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश, OLX पर खोजते थे ग्राहक

Updated at : 07 Aug 2016 8:37 AM (IST)
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अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का पर्दाफाश, OLX पर खोजते थे ग्राहक

जमशेदपुर: चाेरी की सात बड़ी गाड़ी, सैकड़ों फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आइडी व अन्य कई कागजातों के साथ पुलिस ने अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार सदस्यों में सुनील कुमार सिंह, टिंकू दास और मनीष अग्रवाल शामिल हैं. गिरोह के सरगना सहित कई अन्य सदस्य अब भी […]

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जमशेदपुर: चाेरी की सात बड़ी गाड़ी, सैकड़ों फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आइडी व अन्य कई कागजातों के साथ पुलिस ने अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार सदस्यों में सुनील कुमार सिंह, टिंकू दास और मनीष अग्रवाल शामिल हैं. गिरोह के सरगना सहित कई अन्य सदस्य अब भी फरार हैं. गिरोह का सरगना व उससे जुड़े सदस्य छपरा और सीवान के रहने वाले हैं. उक्त जानकारी वरीय पुलिस अधीक्षक अनूप टी मैथ्यू ने शनिवार को अपने कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन में दी.
ऐसे पकड़ाये गिरोह के सदस्य. एसएसपी ने बताया कि पांच जुलाई को पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि बिरसानगर थाना क्षेत्र से एक कार चोरी कर आदित्यपुर की ओर बेचने के लिए ले जाया जा रहा है. सूचना के बाद गोलमुरी चौक पर वाहन चेकिंग अभियान चलाया गया. चेकिंग के दौरान एक सफेद रंग की कार पर सवार लोग पुलिस को देख कर भागने लगे. पुलिस पदाधिकारियों ने ओवरटेक कर उन्हें पकड़ा. कार में तीन लोग बैठे थे. जांच के दौरान कार का पेपर फर्जी पाया गया. जिसके बाद तीनों को गिरफ्तार कर थाना लाया गया. कड़ाई से पूछताछ के दौरान तीनों ने बताया कि वह बिरसानगर से कार चोरी कर आदित्यपुर में बेचने जा रहे थे. उनकी निशानदेही पर चोरी गयी सात बड़ी गाड़ियों को गोविंदपुर, बिरसानगर, चांडिल से बरामद किया गया.
राजस्थान में बेेची सबसे ज्यादा गाड़ी
सुनील सिंह ने पुलिस को बताया कि सरगना से गाड़ी खरीदने के बाद वह गाड़ी का फोटो खींच कर ओएलएक्स पर डाल देता था. गाड़ी की कीमत ज्यादा नहीं होने के कारण जल्द ग्राहक मिल जाते थे. उसके बाद वे लोग यह देखते थे कि कौन ग्राहक कहां का रहने वाला है. जिस ग्राहक का घर जमशेदपुर से सबसे ज्यादा दूर होता था, गिरोह उसी को गाड़ी बेचते थे. उसने बताया कि ओएलएक्स पर गाड़ी का फोटो अपलोड करने पर ग्राहक जल्द मिल जाते हैं. गाड़ी बिकने के बाद तीनों आपस में पैसे बांट लेते थे. सबसे ज्यादा पैसा सुनील अपने पास रखता था. सबसे कम पैसा टिंकू गोप को दिया जाता था.
दो से ढाई लाख में बेचते थे गाड़ी
सुनील दो से ढाई लाख रुपये में गाड़ी बेच देता था. सरगना से गाड़ी खरीदने के दौरान डेढ़ लाख रुपये तक में सौदा होता था. सौदा होने के बाद गाड़ी का पूरा पैसा नहीं दिया जाता था. गाड़ी की बिक्री होने के बाद शेष राशि बैंक खाता में डाल दी जाती थी. सुनील ने पुलिस को बताया कि सबसे ज्यादा चोरी की गाड़ी छपरा के शिवपूजन से खरीदी गयी है.
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