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तीन घंटे बाद भी शंकोसाई में घूम रहे थे शूटर

3 Jan, 2014 9:42 am
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तीन घंटे बाद भी शंकोसाई में घूम रहे थे शूटर

जमशेदपुर: शकुंतला उर्फ बेबी मिश्र एवं बैजू उर्फ रौशन प्रसाद के हत्यारे बुधवार रात 11 बजे तक शंकोसाई में ही घूम रहे थे. स्थानीय लोगों के मुताबिक तीन अपराधी हीरो होंडा पैशन प्रो बाइक पर सवार थे. जबकि एक अन्य पल्सर पर उनके सहयोगी थे. शंकोसाई रोड नंबर 5 में देखे जाने पर युवकों ने […]

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जमशेदपुर: शकुंतला उर्फ बेबी मिश्र एवं बैजू उर्फ रौशन प्रसाद के हत्यारे बुधवार रात 11 बजे तक शंकोसाई में ही घूम रहे थे. स्थानीय लोगों के मुताबिक तीन अपराधी हीरो होंडा पैशन प्रो बाइक पर सवार थे. जबकि एक अन्य पल्सर पर उनके सहयोगी थे. शंकोसाई रोड नंबर 5 में देखे जाने पर युवकों ने इसकी सूचना पुलिस को भी दी थी. उनका पीछा भी किया था. लेकिन अपराधी हाथ नहीं लगे.

गांजा भी लिया था
युवकों के मुताबिक अपराधियों ने शंकोसाई रोड नंबर 5 की एक दुकान से गांजा भी लिया था. हालांकि पुलिस का कहना है कि अपराधी तीन घंटे तक शंकोसाई में नहीं थे. घटना के बाद पूरे शंकोसाई में फोर्स का मूवमेंट था. ऐसी स्थिति में अपराधी उस क्षेत्र में नहीं हो सकते.

हुलिया एक जैसा
दोहरे हत्याकांड और जुगसलाई – परसुडीह में हुई लूट की घटना में शामिल अपराधियों का हुलिया एक ही तरह का आया है. तीनों घटना में एक ही ग्रुप शामिल था या दूसरे ग्रुप ने घटना को अंजाम दिया, यह पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा.

पतले, लंबे युवक ने चलायी गोली
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पतले, लंबे और गोरे अपराधी ने बैजू और शकुंतला पर गोली चलायी. वह दाहिने हथेली में कपड़ा बांधे हुए था.

दोनों का हुआ पोस्टमार्टम
शकुंतला एवं बैजू के शव का गुरुवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम कराया गया. शकुंतला को गर्दन के निचले हिस्से में एक गोली लगी थी, जो पीछे की ओर से छेद कर निकल गयी. बैजू प्रसाद को एक गोली सिर में एवं दूसरी पंजरे में लगी थी. उसके शरीर से एक गोली मिली है.

आज होगा अंतिम संस्कार
दोनों के शव को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के शीत गृह में रखा गया है. कल दोनों का अंतिम संस्कार किया जायेगा.

बैजू की पत्नी, बच्चे लौटे
बैजू की पत्नी ममता एवं दोनों बच्चे जीत व चित दुर्गापुर से लौटे. ममता का मायका भुइयांडीह में है. वह बच्चों के साथ मौसी के घर दुर्गापुर गयी हुई थी. इधर बैजू के घर में सुबह से ही रिश्तेदारों व स्थानीय लोगों की भीड़ लगी हुई थी. सास समेत पूरे परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल था. एक कोने में उनके पिता जेलर प्रसाद गुमशुम बैठे थे. बैजू की पत्नी दहाड़ मार कर रो रही थी. महिलाओं ने उन्हें संभाला. वह बार-बार घर के लोगों से पूछ रही थी कि बैजू ने किसी का क्या बिगाड़ा था.

शकुंतला की मां रही गुमशुम
शकुंतला के घर में सन्नाटा छाया था. बेटी की आंखों के सामने हुई हत्या ने उनकी मां आशा देवी को तोड़ कर रख दिया है. वह घर के गेट के पास गुमशुम बैठी हुई थी. दिन भर राजनीतिक दलों के लोगों का यहां आना-जाना लगा रहा.

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