खर्राटा लेना है बीमारी, स्वाभाविक प्रक्रिया नहीं…, मनमोहन 8,9फ्लैग ::: एमजीएम मेडिकल कॉलेज में स्लीप एप्निया पर सेमिनारसंवाददाता, जमशेदपुर सोते वक्त खर्राटे लेने को आमतौर पर एक स्वाभाविक प्रक्रिया माना जाता है. दरअसल यह एक बीमारी है, जो श्वसन प्रक्रिया में अवरोध का परिणाम है. इलाज नहीं कराने पर यह हार्ट अटैक, शुगर, ब्रेन की समस्या का कारण बन जाती है. उक्त बातें शनिवार को एमजीएम मेडिकल कॉलेज के प्रेक्षागृह में ‘स्लीप एप्निया’ पर आयोजित सेमिनार में कोलकाता के डॉ रंजीत कुमार सिंह ने कहीं. उन्होंने बताया कि खर्राटे आने से लोगों की नींद भी पूरी नहीं होती है. जिससे कई तरह की बीमारियां हो जाती हैं. सोते समय व्यक्ति की सांस कुछ सेकेंड के लिए सैकड़ों बार रूक जाती हैं. पुन: जब सांस आती है, तो आवाज काफी जोरदार होती है, जो आस-पास सो रहे व्यक्ति को डरा देती है. सांस रुकने की यह अवधि एक सेकेंड से एक मिनट तक हो सकती है. सांस के इस तरह रुकने और फिर वापस आने को ‘एप्निया’ कहा जाता है. इलाज नहीं कराने पर सांस रुकने की अवधि बढ़ती जाती है और फिर एक वक्त ऐसा आता है, जब व्यक्ति की मौत तक हो सकती है. इस दौरान कॉलेज के प्राचार्य डॉ एएन मिश्रा, डॉ निर्मल कुमार सहित कई डॉक्टर व मेडिकल के छात्र उपस्थित थे.प्रदूषण के कारण हो रही है टीबी की बीमारीडॉ रंजीत कुमार सिंह ने बताया कि प्रदूषण के कारण टीबी के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है. जागरुकता के अभाव में लोग सही समय पर इलाज नहीं कराते, जिससे स्थिति और ज्यादा खराब हो जाती है. आज के समय में कई डॉक्टर ऐसे हैं जो बिना जांच किये ही दमा की दवा दे देते हैं, जो गलत है. डॉक्टर सही से जांच करके ही मरीज का इलाज शुरू करें.
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खर्राटा लेना है बीमारी, स्वाभाविक प्रक्रिया नहीं…, मनमोहन 8,9
खर्राटा लेना है बीमारी, स्वाभाविक प्रक्रिया नहीं…, मनमोहन 8,9फ्लैग ::: एमजीएम मेडिकल कॉलेज में स्लीप एप्निया पर सेमिनारसंवाददाता, जमशेदपुर सोते वक्त खर्राटे लेने को आमतौर पर एक स्वाभाविक प्रक्रिया माना जाता है. दरअसल यह एक बीमारी है, जो श्वसन प्रक्रिया में अवरोध का परिणाम है. इलाज नहीं कराने पर यह हार्ट अटैक, शुगर, ब्रेन की […]
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Prabhat Khabar Digital Desk
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