डॉ देबाशीष नंदीकॉर्डियोलॉजिस्टइरेगुलर हार्ट बीट डिजीज को कंट्रोल नहीं किया गया, तो यह जानलेवा हो सकती है. कार्डिएक कॉज के अंदर यह बीमारी दिल बड़ा (कार्डियोमायोपैथी), दिल के अंदर मौजूद वॉल्व के डिसऑर्डर, हाइ ब्लड प्रेशर, दिल के नसों में ब्लॉकेज व इलेक्ट्रोलाइट डिसबैलेंस आदि कारणों से हो सकती है. नॉन कार्डिएक कॉज के अंतर्गत यह बीमारी शरीर में खून की कमी (एनिमिया), बुखार, थायरोडटॉक्सिक, कॉफी-चाय का अत्यधित सेवन, तंबाकू व शराब का सेवन आदि से भी हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि इस बीमारी से काफी सावधान रहा जाये. इस बीमारी में मरीज का दिल जोर से धड़कता है, सिर चकराता है, सिर में हल्का-हल्का दर्द होता है, मरीज औसत से कम सांस ले पाता है. अच्छी तरह सांस नहीं ले पाता है. छाती में असहज महसूस करता है. इस रोग से पीडि़त मरीज में सामान्य तौर पर इसी प्रकार के लक्षण दिखायी देते हैं. शरीर में इस प्रकार के लक्षण दिखायी देने पर कार्डियोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए. इस बीमारी से बचने के लिए तंबाकू व शराब के साथ-साथ नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिये. चाय व कॉफी का सेवन कम करें तथा बिना डॉक्टरी सलाह के कभी दवा न लें. बीमारी : इरेगुलर हार्ट बीट. लक्षण : दिल का जोर से धड़कना, चक्कर आना, सिर में दर्द होना, औसत से कम सांस लेना व असहज महसूस होना. उपाय : तंबाकू व शराब आदि नशीले पदार्थों का सेवन न करें, चाय व कॉफी का सेवन कम करें, बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें.
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हार्ट बीट इरेगुलर हो तो, सतर्क हो जाएं
डॉ देबाशीष नंदीकॉर्डियोलॉजिस्टइरेगुलर हार्ट बीट डिजीज को कंट्रोल नहीं किया गया, तो यह जानलेवा हो सकती है. कार्डिएक कॉज के अंदर यह बीमारी दिल बड़ा (कार्डियोमायोपैथी), दिल के अंदर मौजूद वॉल्व के डिसऑर्डर, हाइ ब्लड प्रेशर, दिल के नसों में ब्लॉकेज व इलेक्ट्रोलाइट डिसबैलेंस आदि कारणों से हो सकती है. नॉन कार्डिएक कॉज के अंतर्गत […]
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Prabhat Khabar Digital Desk
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