नाले के पानी में धोये जा रहे हैं अस्पताल के चादर व डॉक्टरों के ड्रेस, संक्रमण का खतरा

जमशेदपुर : स्वस्थ रहने के लिए डॉक्टर शरीर के साथ-साथ कपड़े व आसपास की साफ-सफाई पर जोर देते हैं. लेकिन खासमहल स्थित सदर अस्पताल खुद स्वास्थ्य से जुड़े मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है. मरीजों के ऑपरेशन से लेकर पहनने और सोने के लिए जिन कपड़ों का इस्तेमाल किया जाता है, वे कपड़े संक्रमण […]
जमशेदपुर : स्वस्थ रहने के लिए डॉक्टर शरीर के साथ-साथ कपड़े व आसपास की साफ-सफाई पर जोर देते हैं. लेकिन खासमहल स्थित सदर अस्पताल खुद स्वास्थ्य से जुड़े मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है. मरीजों के ऑपरेशन से लेकर पहनने और सोने के लिए जिन कपड़ों का इस्तेमाल किया जाता है, वे कपड़े संक्रमण फैला रहे हैं.
जुगसलाई रंग गेट के पास स्थित नाली में सदर अस्पताल के ओटी के कपड़े, वार्ड के चादर व कंबल की धुलाई की जा रही है. इन कपड़ों के इस्तेमाल से मरीजों में इन्फेक्शन फैलने का खतरा बना हुआ है. इतना ही नहीं चादर, ड्रेस, कंबल धुलाई के बाद उसी जमीन पर सुखाया जाता है, जहां चारों ओर गंदगी फैली रहती है.
बैक्टीरिया होने की आशंका : एमजीएम के सर्जन डॉ ललित मिंज ने कहा कि गंदगी के बीच कपड़े को सुखाना खतरनाक हो सकता है. नाली के पानी में साफ किया गया ड्रेस पहन डॉक्टर मरीज की सर्जरी करता है. गंदे स्थानों पर कपड़े सुखाने के कारण कपड़ों में बैक्टीरिया सटे होने की आशंका बनी रहती है.
सर्जरी के मरीजों के लिए यह खतरनाक है. उनका घाव कई दिनों तक नहीं सूखता है. इसके साथ ही सांस के मरीजों को भी गंदे चादरों की वजह से बैक्टीरिया व फंगस से होने वाली बीमारियां जल्दी होती है.
एमसीआइ के नियम के विरुद्ध है नाली में अस्पताल के कपड़े साफ करना : मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआइ) के मापदंडों के अनुसार मरीजों व डॉक्टरों के कपड़ों की बेहतर धुलाई के लिए अस्पताल में मैकनाइज्ड लांड्री का होना ॉजरूरी है. नियमानुसार कपड़े हाथ से नहीं धोये जाने चाहिए.
इन्हें मशीन में ही सुखाने की शर्त है, लेकिन सदर अस्पताल सहित शहर के कई अस्पताल व नर्सिंग होम में इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है. नियम को ताक पर रखकर कपड़ों की धुलाई नाली में किये जाने के साथ ही गंदे जगहों पर सुखाया जाता है, जाे कि मरीजों के हित में नहीं है.
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