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झारखंड : 69 अल्पसंख्यक शिक्षकों में से 60 की नियुक्ति अवैध!

Updated at : 02 Mar 2019 11:01 AM (IST)
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झारखंड : 69 अल्पसंख्यक शिक्षकों में से 60 की नियुक्ति अवैध!

संदीप सावर्ण-गलत तरीके से हुई नियुक्ति की शिक्षा एवं साक्षरता विभाग नहीं करेगा अनुमोदनजमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले के अल्पसंख्यक व सहायता प्राप्त स्कूलों में 77 शिक्षकों की नियुक्ति विभिन्न स्कूलों की प्रबंधन समिति ने गलत तरीके से कर ली है. शिक्षकों की नियुक्ति में शिक्षक नियमावली 2012 का पालन नहीं किया गया. यह खुलासा […]

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संदीप सावर्ण
-गलत तरीके से हुई नियुक्ति की शिक्षा एवं साक्षरता विभाग नहीं करेगा अनुमोदन
जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले के अल्पसंख्यक व सहायता प्राप्त स्कूलों में 77 शिक्षकों की नियुक्ति विभिन्न स्कूलों की प्रबंधन समिति ने गलत तरीके से कर ली है. शिक्षकों की नियुक्ति में शिक्षक नियमावली 2012 का पालन नहीं किया गया. यह खुलासा प्राथमिक शिक्षा निदेशक द्वारा बीते दिनों 69 शिक्षकों की फाइल की जांच में हुआ.

अल्पसंख्यक स्कूलों में बहाली के लिए सरकार द्वारा नवंबर 2012 में शिक्षक नियमावली बनायी गयी थी. नियमावली में स्पष्ट है कि अल्पसंख्यक स्कूलों में शिक्षक बनने की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता इंटर है. इसके अलावा शिक्षक को दो साल का बेसिक टीचर ट्रेनिंग व टेट पास होना अनिवार्य है. इस नियम के अनुसार अगर कोई शिक्षक उच्च शिक्षा हासिल किया हो, बीएड डिग्रीधारी अौर टेट पास हो, इसके बावजूद भी वह अल्पसंख्यक स्कूल व सहायता प्राप्त स्कूल में पहली से पांचवीं क्लास तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए तय मानक के अनुरूप फिट नहीं है.

कहां हुई गड़बड़ी

शिक्षक नियमावली के अनुसार अल्पसंख्यक स्कूलों में छठी से आठवीं कक्षा तक के लिए पद स्वीकृत नहीं है. पूर्वी सिंहभूम जिले में ऐसे शिक्षकों को भी बहाल कर लिया गया जिन्होंने बेसिक टीचर ट्रेनिंग नहीं की है. साथ ही बीएड व टेट की डिग्रीधारी शिक्षकों को पहली से पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए बहाल कर लिया गया. अल्पसंख्यक व सहायता प्राप्त स्कूलों में बहाल 42 शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने ग्रेजुएशन किया है, उनके पास बीएड की डिग्री व टेट पास भी है. ये लोग छठी से आठवीं तक पढ़ाने की अर्हता रखते हैं. लेकिन इनके लिए स्कूलों में स्वीकृत पद ही नहीं है. 16 ऐसे टीचर हैं जिन्होंने टेट पास नहीं किया है और उनकी नियुक्ति कर ली गयी है. दो टीचर ऐसे हैं जो अोवरएज हैं. तमाम अनियमितता के बावजूद करीब आठ साल से स्कूलों में अपनी नियुक्ति के अनुमोदन की आस में ये शिक्षक लगातार पढ़ा रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मिल सकती है राहत

वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसला दिया. इस फैसले में बताया गया कि अल्पसंख्यक स्कूलों पर आरटीइ लागू नहीं होगा. जबकि शिक्षक पात्रता परीक्षा आरटीइ की ही उपज है. पूर्व में कई उदाहरण मिल चुके हैं जिसके आलोक में इस तरह के मामले में आने पर शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया गया है.

पे ग्रेड 4200 के लिए कम से कम इंटर पास, जेटेट की डिग्री व ट्रेंड होना अनिवार्य है. इस अर्हता को जो भी पूरा नहीं करते हैं, उनकी बहाली संभव नहीं है.
अमरेंद्र प्रताप सिंह, सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग

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