आदिवासी बच्चे बनेंगे प्रबंधक

Updated at : 19 Jun 2014 10:43 AM (IST)
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आदिवासी बच्चे बनेंगे प्रबंधक

जमशेदपुर: शहर सहित चाईबासा और मंझगांव के गरीब बच्चों को देश का प्रमुख प्रबंधकीय संस्थान जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट भुवनेश्वर (एक्सआइएमबी) में दाखिला मिला है. इनमें तीन आदिवासी लड़की और एक युवक है. टाटा स्टील ने इन चारों की पढ़ाई पर करीब 45 लाख रुपये खर्च करेगी. एक बच्चे पर प्रति वर्ष करीब 6 लाख […]

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जमशेदपुर: शहर सहित चाईबासा और मंझगांव के गरीब बच्चों को देश का प्रमुख प्रबंधकीय संस्थान जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट भुवनेश्वर (एक्सआइएमबी) में दाखिला मिला है. इनमें तीन आदिवासी लड़की और एक युवक है.

टाटा स्टील ने इन चारों की पढ़ाई पर करीब 45 लाख रुपये खर्च करेगी. एक बच्चे पर प्रति वर्ष करीब 6 लाख रुपये का खर्च आयेगा. ये ग्रामीण प्रबंधकीय कार्यक्रम (रूरल मैनेजमेंट प्रोग्राम) के तहत एमबीए का फुल टाइम कोर्स करेंगे.

टाटा स्टील के कॉरपोरेट सोशल रेस्पांसब्लिटी विभाग ने उनके आने-जाने, रहने और उनकी पढ़ाई का उचित इंतजाम कराया है. बुधवार को टाटा स्टील के सीएसआर के चीफ बिरेन भुट्टा और उर्मिला एक्का ने संयुक्त रूप से प्रेस कांफ्रेंस कर इसकी जानकारी दी और बताया कि वे चाहते हैं कि गांवों के टैलेंट को आगे लाकर सही मुकाम तक पहुंचाये. इस दिशा में पिछले साल चार बच्चों में से दो को जबलपुर में मैनेमजेंट करने और दो को टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस (टिस) में ट्रेनिंग के लिए भेजा था. उसका खर्च कंपनी की ओर से ही उठाया गया था.

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