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कल प्रभात खबर के कार्यक्रम में कुमार विश्वास की कविता पर झूमेगी लौहनगरी

Updated at : 04 Oct 2018 6:23 AM (IST)
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कल प्रभात खबर के कार्यक्रम में कुमार विश्वास की कविता पर झूमेगी लौहनगरी

जमशेदपुर : ‘कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!’ ये पंक्तियां हैं मशहूर कवि कुमार विश्वास की. इन पंक्तियों को कुमार विश्वास अपने स्वर में ढाल कर खुद आप तक पहुंचाने के लिए आपके शहर पहुंच रहे हैं. मौका होगा प्रभात खबर की […]

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जमशेदपुर : ‘कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है ! मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!’ ये पंक्तियां हैं मशहूर कवि कुमार विश्वास की. इन पंक्तियों को कुमार विश्वास अपने स्वर में ढाल कर खुद आप तक पहुंचाने के लिए आपके शहर पहुंच रहे हैं. मौका होगा प्रभात खबर की ओर से एक्सएलआरआइ प्रेक्षागृह में शुक्रवार कीशाम साढ़े पांच बजे से आयोजित गुरु सम्मान समाराेह की.
इस आयोजन में कुमार विश्वास कविताओं की बौछार करेंगे और लौहनगरी के लोगों को झूमने को विवश कर देंगे. प्रभात खबर के गुरु सम्मान समाराेह में काेल्हान के 35 से अधिक शिक्षाविद्-गुरुआें का सम्मानित किया जायेगा. इसके बाद मशहूर कवि कुमार विश्वास की महफिल जमेगी.
मुमताज व मंजर भोपाली भी देंगे दमदार प्रस्तुति
भाषा विज्ञानियों का कहना है कि किसी भी भाषा की उन्नति उसके अधिक से अधिक प्रसार में है. कोई भाषा जितने अधिक लोगों द्वारा बोली जायेगी, उतनी ही मजबूत होगी. हिंदी के बारे में जब हम सोचते हैं तो कुछ छवियां मन मस्तिष्क में उभरती हैं, उनमें डॉक्टर कुमार विश्वास का नाम प्रमुख है. उन्होंने अपनी कविताओं, शायरी, लाजवाब संवाद अदायगी और सुरीले कंठ की बदौलत हिंदी को दुनियाभर में प्रतिष्ठित किया.
प्रभात खबर के सम्मान समाराेह में कुमार …जब भी मुंह ढंक लेता हूं…तेरे जुल्फों की छांव में…कोई दीवाना कहता है… समेत लड़ी के रूप में वे कई काव्य पाठ करेंगे. समाराेह में कवि मुमताज नसीम एवं कवि मंजर भोपाली भी अपनी दमदार प्रस्तुति देंगे.कुमार विश्वास एक ऐसे कवि हैं, जिन्हाेंने दिल की आवाज को सुनकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई छोड़ी दी, पीसीएस की नौकरी भी छोड़ दी.
कविता और हिंदी ने इन्हें इस तरह अपनी ओर खींचा कि हिंदी की सेवा में लग गये. मोहब्बत के शायर, शब्दों के धनी और अपनी कविताओं से दुनिया का रुख हिंदी की तरफ मोड़ देने वाले डॉक्टर कुमार विश्वास ने जिस तन्मयता से हिंदी की सेवा की है, वह हिंदी समाज के लिए एक प्रेरणा है.
हिंदी के इस मुखर कवि ने जब मंच से गीत गाया-‘कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है’ तो लाखाें युवाओं ने इसे हाथों-हाथ लिया और अपना प्रेम गान बना लिया. लोगों की ऐसी समझ बनती है कि कुमार विश्वास ने अपनी प्रेम कविताओं के माध्यम से लोगों के दिलों में जगह बनायी, इससे इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन सत्य यह भी है कि कुमार ने कविता के लिए बहुत सरल और सहज हिंदी का चुनाव किया.
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