शहर में औसतन हर माह दो बच्चे दे रहे जान

Updated at : 05 Sep 2018 6:00 AM (IST)
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शहर में औसतन हर माह दो बच्चे दे रहे जान

जमशेदपुर : पढ़ाई का दबाव और मोबाइल व इंटरनेट की लत ने बच्चों से उनका बचपन छीन लिया है. शहर के बच्चे तेजी से डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं. तनाव और अत्यधिक दबाव के कारण बच्चों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ रही है. एक आंकड़े के अनुसार, जमशेदपुर में इस वर्ष अगस्त तक 17 […]

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जमशेदपुर : पढ़ाई का दबाव और मोबाइल व इंटरनेट की लत ने बच्चों से उनका बचपन छीन लिया है. शहर के बच्चे तेजी से डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं. तनाव और अत्यधिक दबाव के कारण बच्चों में आत्महत्या की प्रवृत्ति बढ़ रही है. एक आंकड़े के अनुसार, जमशेदपुर में इस वर्ष अगस्त तक 17 बच्चों ने आत्महत्या कर ली. यानी औसतन हर माह शहर के दो बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं. यह वर्तमान जीवन शैली में आ रहे बदलावों का नतीजा है. बच्चे छोटी-छोटी बातों पर खतरनाक कदम उठा रहे हैं. उनमें सहनशीलता खत्म हो रही है.

आंकड़ों की मानें, तो शहर के बच्चों में इस तरह की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है. पिछले साल आत्महत्या के 21 मामले सामने आये थे. इसी तरह 2016 में 14 और 2015 में 13 मामले सामने आये थे. पर इस साल अगस्त तक ही ऐसे 21 मामले
पिछले तीन साल में बढ़ी आत्महत्या की प्रवृत्ति
छोटी-छोटी बातों पर उठा रहे खतरनाक कदम
मोबाइल व इंटरनेट की लत छिन रहा बचपन
बच्चों की आत्महत्या के आंकड़े
वर्ष संख्या
2010 43
2011 39
2012 32
2013 40
2014 30
2015 13
2016 14
2017 21
2018 17 (अगस्त)
(स्रोत : संस्था जीवन)
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