वे दिन आज भी नहीं भूलते कोल्हान के स्वतंत्रता सेनानी

Updated at : 15 Aug 2018 6:28 AM (IST)
विज्ञापन
वे दिन आज भी नहीं भूलते कोल्हान के स्वतंत्रता सेनानी

देश आज 72 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है़ देश के िलए जान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर रहा है. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रभात खबर की टीम कोल्हान के दो ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों तक जा पहुंची, जिन्होंने देश को आजाद कराने में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया. अपने व परिवार की […]

विज्ञापन
देश आज 72 वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है़ देश के िलए जान देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को याद कर रहा है. स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रभात खबर की टीम कोल्हान के दो ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों तक जा पहुंची, जिन्होंने देश को आजाद कराने में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया. अपने व परिवार की भी परवाह नहीं की. प्रभात खबर ने उनसे उनकी ही जुबानी स्वतंत्रता आंदोलन की कहानी जानने का प्रयास किया. हम यहां उसे प्रकाशित कर रहे हैं.
अंग्रेजों के सूचना तंत्र को नष्ट करते थे चंद्रकुमार
चाकुलिया : चाकुलिया नगर पंचायत के पुराना बाजार निवासी स्वतंत्रता सेनानी चंद्रकुमार मिश्रा 21 साल की उम्र में ही स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे. 96 साल के हो गये, याद्दाश्त कमजोर हो गयी, पर देश भक्ति की भावना उनके मन में अब भी हलोरें मार रही हैं. उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के घाटमपुर गांव के मूल निवासी चंद्रकुमार मिश्रा बताते हैं : स्वतंत्रता सेनानियों का उद्देश्य होता था, अंग्रेजों के सूचना तंत्र को नष्ट करना. सहयोगियों के साथ कई बार अंग्रेजों के सूचना तंत्र को नष्ट भी किया.
एक बार टेलीफोन के खंभे पर चढ़ कर तार का कनेक्शन काटते वक्त पकड़ा गया. जेल भी भेजा गया था. चंद्रकुमार मिश्रा बताते हैं सहयोगियों में नित्य गोपाल राय, नसीरुद्दीन अंसारी, स्वतंत्रता सेनानी स्व गौरहरि मल्लिक, घानीराम हांसदा शामिल थे. अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ साइकिल से ही घूम-घूम कर गांवों में बैठक करते थे. साइकिल से ही पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर तक जाकर स्वतंत्रता संग्राम की बैठक में भाग लिया था. अंग्रेजों से छिपकर कई माह मेदिनीपुर और चाईबासा में छिपे थे. श्री मिश्रा के परिवार में चार पुत्र और एक पुत्री हैं. वर्तमान में अपने पुत्र विजय मिश्रा के साथ रह रहे हैं.
मिल चुका है सम्मान
उन्होंने बताया : दिल्ली में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम समेत अन्य के हाथों सम्मान मिल चुका है. स्वतंत्रता सेनानी पेंशन मिलती है. रेलवे ने पास दिया है. सपना देखा था कि देश को आजादी मिले और अपना शासन हो, चारों ओर खुशियां ही खुशियां हों. परंतु ऐसा नहीं हो पाया. आज देश में भ्रष्टाचार का बोलबाला है. पहले देश के नागरिकों के बीच जो प्रेम और भाईचारा देखने को मिलता था वह अब नहीं है. आजादी के पूर्व देश बाहरी शक्तियों से जूझ रहा था और अब आपस में जुझना पड़ रहा है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola