अपनी मांगों के लिए संघर्ष के अलावा कोई रास्ता नहीं

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जमशेदपुर : झारखंड कुर्मी संघर्ष माेर्चा के बैनर तले 29 अप्रैल काे रांची स्थित माेरहाबादी मैदान में कुर्मियों का महाजुटान होगा. इसकाे लेकर झारखंड आंदाेलनकारी सह पूर्व सांसद शैलेंद्र महताे कोल्हान के तीनाें जिलाें में संपर्क अभियान में जुटे हुए हैं. बुधवार काे अपने आवास पर पत्रकाराें से बातचीत में शैलेंद्र महतो ने कहा कि […]

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जमशेदपुर : झारखंड कुर्मी संघर्ष माेर्चा के बैनर तले 29 अप्रैल काे रांची स्थित माेरहाबादी मैदान में कुर्मियों का महाजुटान होगा. इसकाे लेकर झारखंड आंदाेलनकारी सह पूर्व सांसद शैलेंद्र महताे कोल्हान के तीनाें जिलाें में संपर्क अभियान में जुटे हुए हैं. बुधवार काे अपने आवास पर पत्रकाराें से बातचीत में शैलेंद्र महतो ने कहा कि 23 नवंबर 2004 काे झारखंड सरकार द्वारा कुर्मी-कुड़मी जाति काे अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल करने की अनुशंसा केंद्र काे भेजी थी.
11 साल बाद केंद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के निदेशक राजीव प्रकाश ने झारखंड सरकार के सचिव (कार्मिक-प्रशासनिक) काे रघुवर दास सरकार के 10 फरवरी 2015 के पत्र का हवाला देते हुए लिखा कि मानव जातीय रिपाेर्ट के अनुसार झारखंड के कुर्मी (महताे) जाति की सामाजिक-आर्थिक स्थिति अनुसूचित जनजातियाें से अच्छी है. इसलिए इस जाति काे यथास्थिति बनाये रखने की आवश्यकता है.
श्री महताे ने कहा कि केंद्र की रिपाेर्ट तथ्यहीन, आधारहीन है. वे झारखंड जनजातीय शाेध संस्थान से पूछना चाहते हैं कि वर्तमान में जाे आदिवासी नेता, मंत्री अफसर, अनुसूचित जनजाति का लाभ ले रहे हैं आैर सामाजिक, आर्थिक रूप से संपन्न हैं, ताे क्या उन्हें अनुसूचित जनजाति की सूची से हटा दिया जायेगा? गजट अॉफ इंडिया (1913) आैर बिहार एंड आेड़िशा गजट (1931) जिसमें मुंडा, संथाल, उरांव, हाे, भूमिज, खड़िया आदि जनजाति के साथ-साथ टाेटाेमिक कुर्मी जाति काे जनजाति माना है. श्री महताे ने कहा कि शिक्षा-नाैकरी में कुड़मी पिछड़े हुए हैं. शिडयूल क्षेत्र में पेशा कानून के कारण से पंचायत चुनाव से भी उन्हें बेदखल हाेना पड़ा. कुड़मियाें की अधिकांश जमीन बड़े सरकारी प्राेजेक्टाें ने अपने अधीन कर ली. अब कुड़मियाें के पास संघर्ष ही रास्ता बचा है.
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