जमशेदपुर : एमजीएम अस्पताल के मेडिसिन वार्ड में भर्ती कदमा शास्त्रीनगर निवासी कन्वाई चालक अब्दुल सलीम (45) की गुरुवार शाम इलाज के दौरान मौत हो गयी. उसे बुधवार सुबह सांस लेने में तकलीफ और ठंड लगने की शिकायत पर भर्ती कराया गया था. गुरुवार दोपहर बाद कुछ तकलीफ महसूस होने पर डॉक्टरों ने उसे इंजेक्शन लगाया. इसके 15 मिनट बाद ही उसे खून की उल्टियां हुईं. डॉक्टरों ने उन्हें टीएमएच ले जाने की सलाह दी. परिजन एंबुलेंस और स्ट्रेचर के लिए अस्पताल में भागते रहे.
45 मिनट तक एंबुलेंस नहीं मिली. इधर, अब्दुल ने दम तोड़ दिया. अब्दुल की मौत के बाद परिजनों ने मेडिसिन वार्ड में जमकर हंगामा और तोड़फोड़ की. इसके बाद अस्पताल में पुलिस बल तैनात कर दिया गया. अब्दुल की पत्नी मिट्ठू अजमेर में हैं. उनकी तीन बेटियां और एक बेटा है. वह परिवार का अकेले कमाने वाला था.
परिजनों ने बताया कि करीब पौने तीन बजे उसे कुछ तकलीफ हुई. डॉक्टर ने उसे सेफोटाक्सीम सोडियम नाम का इंजेक्शन लगाया. इसके बाद तबीयत बिगड़ने लगी. हंगामा शुरू होते ही वार्ड में मौजूद डॉक्टर व नर्स कागजात के साथ निकल गये. हंगामे के बीच परिजन अस्पताल परिसर में ही धरना देकर बैठ गये.
खराब हो गये थे फेफड़े. डॉ. केके अइयर ने मीडिया को बताया कि मरीज किडनी की बीमारी से पीड़ित था. इसी बीच उसे निमोनिया हो गया. बीमारियों के दुष्प्रभाव से उसके फेफड़े खराब हो गये थे. अभी जांच रिपोर्ट आ रही थी. इसी बीच मौत हो गई. इसमें किसी की कोई लापरवाही नहीं है.
आत्मदाह की चेतावनी. घटना के बाद परिजन शव को अस्पताल में रखकर धरना देने पर अड़ गये. सूचना मिलते ही साकची थाना प्रभारी माैके पर पहुंचे. परिजनों का कहना था कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वह सब एक साथ मिलकर अस्पताल परिसर में ही आत्मदाह कर लेंगे.
टीएमएच के शव गृह में रखा: विवाद को खत्म करने के लिए पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन की ओर से एमजीएम अस्पताल में एक अधिकारी को मजिस्ट्रेट के रूप में भेजा. मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में वार्ता हुई. कहा गया कि अगर परिजन पूरे मामले की जांच कराना चाहते हैं, ताे शव का पोस्टमार्टम कराना पड़ेगा. परिजन इसके लिए तैयार नहीं हुए. अस्पताल प्रशासन ने शव को रखने के लिए कहा. लेकिन परिजनों ने टीएमएच में रखने का निर्णय लिया. प्रशासन ने गृह रक्षा वाहिनी के जवानों के साथ शव को टीएमएच भेज दिया. वहां शव गृह में लाश को रख दिया गया है.
इलाज के अलग-अलग दावे
परिजनों का दावा है कि मरीज का इलाज डॉ. हीरा लाल मुर्मू की यूनिट में चल रहा था. वह खुद मरीज को नहीं देख रहे थे. अलग-अलग चिकित्सक अलग-अलग समय पर आकर अलग-अलग दवा दे रहे थे.
मरीज के पैथोलॉजी जांच के लिए लिखी गई पर्ची पर डॉ. केके आइयर का नाम लिखा गया है. परिजन कह रहे है कि पर्चा लिखने वाला चिकित्सक ही उन्हें देख रहा था.
अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. नकुल चौधरी ने अपने बयान में कहा कि मरीज का इलाज डॉ. हीरा लाल मुर्मू की यूनिट में डॉ. रवि भूषण अग्रवाल की ओर से किया जा रहा था. अंतिम समय में उन्होंने ही मरीज को देखा
परिजनों की ओर से कहा गया कि मरीज की हालत ठीक थी. इंजेक्शन देने के बाद उनकी हालत खराब हुई. जिस चिकित्सक ने इंजेक्शन दिया, उसने अपना नेम प्लेट नहीं लगाया हुआ था.
दो घंटे बाद पहुंचे उपाधीक्षक ने की वार्ता
विवाद के बीच दो घंटे बाद उपाधीक्षक नकुल चौधरी वार्ता को पहुंचे. थाना प्रभारी की मौजूदगी में वार्ता हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला. अस्पताल अधीक्षक ने शिकायत के आलोक में शुक्रवार को मेडिकल बोर्ड गठित कर मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया. वहीं परिवार के लोगों ने आरोप लगाया कि मरीज के इलाज से जुड़े कई कागजात लेकर चिकित्सक व नर्स फरार हो गये हैं. पुलिस ने परिजनों की शिकायत दर्ज कर ली है. उपाधीक्षक के साथ वार्ड में जाकर भी स्थिति का जायजा लिया.