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झारखंड : एवरेस्ट फतह करेंगे ये तीन युवा पर्वतारोही, 25 मार्च से शुरू होगा अभियान

Updated at : 24 Feb 2018 5:04 AM (IST)
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झारखंड : एवरेस्ट फतह करेंगे ये तीन युवा पर्वतारोही, 25 मार्च से शुरू होगा अभियान

जमशेदपुर : एंडवेंचर स्पोर्ट्स और नारी सशक्तीकरण को बढ़ावा दे रही टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन इस वर्ष तीन युवा पर्वतारोहियों को एवरेस्ट एक्सपीडीशन पर भेजेगी. टाटा स्टील इस वर्ष संदीप टोलिया, पूनम व स्वर्णलता दलाइ को एवरेस्ट एक्सपीडिशन पर भेज रही है. इस पूरे एक्सपीडिशन पर लगभग 90 लाख रुपये का खर्च आयेगा. इसमें तीनों […]

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जमशेदपुर : एंडवेंचर स्पोर्ट्स और नारी सशक्तीकरण को बढ़ावा दे रही टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन इस वर्ष तीन युवा पर्वतारोहियों को एवरेस्ट एक्सपीडीशन पर भेजेगी.

टाटा स्टील इस वर्ष संदीप टोलिया, पूनम व स्वर्णलता दलाइ को एवरेस्ट एक्सपीडिशन पर भेज रही है. इस पूरे एक्सपीडिशन पर लगभग 90 लाख रुपये का खर्च आयेगा. इसमें तीनों पर्वतारोही की ट्रेनिंग भी शामिल है. उक्त जानकारी टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन में शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में टीएसएएफ की चीफ बछेंद्री पाल ने दी. उन्होंने बताया कि अभियान की शुरुआत 25 मार्च से होगी. तीनों पर्वतारोही 25 मार्च को दिल्ली से काठमांडू के लिए रवाना होंगे.

जहां से उनकी ट्रेकिंग की शुरुआत होगी. तीनों पर्वतारोही इस बार कम से कम शेरपा का इस्तेमाल करते हुए बेस कैंप तक पहुंचेंगे. 12 अप्रैल को तीनों पर्वतारोही बेस कैंप पहुंचेंगे. जहां वे फाइनल समिट के लिए एक महीने की ट्रेनिंग करेंगे. फाइनल समिट 15 मई तक होने का अनुमान है.

उत्तरकाशी की अनाथ पूनम का पहाड़ जैसा हौसला

टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन की सहयोग से एवरेस्ट अभियान पर जा रही उत्तरकाशी की नाल्ड की रहने वाली पूनम जब छह महीने की थी तो उनकी मां दवेंद्री देवी का निधन हो गया. पांच वर्ष की उम्र में पूनम के सिर से उनके पिता धरेन सिंह राणा का साया भी उठ गया.

वर्ष 2016 में पूनम के भाई कमलेश की एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी. इसके कुछ दिन पहले ही उनके बड़े भाई की मौत भी बीमारी के कारण हो गयी.

कमलेश उत्तरकाशी में टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन के बेस कैंप में गेस्ट इंस्ट्रक्टर का काम करते थे. भाई के मौत के बाद पूनम का परिवार बहुत बुरे दौर से गुजरने लगा. इसके बाद पूनम की मुलाकात बछेंद्री पाल से वर्ष 2016 में हुई. बछेंद्री पाल ने पूनम को देखते हुए कहा कि तुम कमलेश की बहन हो ना, तो उन्होंने कहा कि हां. इसके बाद बछेंद्री पाल के सहयोग से उत्तरकाशी में पूनम को माली का काम मिल गया.

वह माली के काम के साथ-साथ पर्वतारोहण भी करने लगी. पूनम ने माउंटेनियरिंग में बेसिक के अलावा एडवांस कोर्स भी किया है. पूनम की काबिलियत को देखते हुए बछेंद्री पाल ने उनको 2017 में एवरेस्ट अभियान के लिए टीएसएएफ की टीम में शामिल किया.

स्नातक की छात्रा पूनम के परिवार में फिलहाल एक भाई व दो बहन हैं. पूनम एवरेस्ट फतह करके अपने गांव का नाम पूरे विश्व में प्रसिद्ध करना चाहती है. हाल ही में पूनम साउथ अमेरिका की अंकागुआ एक्सपीडिशन से लौटी हैं.

टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन करेगी मदद

ओड़िशा की स्वर्णलता उनलोगों को देना चाहती है जवाब जो कहते थे-

‘लड़कों वाले काम करने से लड़का नहीं बन जाओगी’

ओड़िशा के जाजपुर की जोखाडीहा की रहने वाली स्वर्णलता दलाइ बेहद निम्न परिवार से हैं. उनके पिता महेश्वर दलाइ व माता प्रमिला दलाइ खेती करके परिवार चलाते हैं.

दो वर्ष पूर्व जब स्वर्णलता को ओड़िशा सरकार ने पर्वतारोहण करने का मौका दिया, तो उनको जिंदगी का एक नया मकसद मिल गया. बीए की फाइनल इयर की छात्रा पूनम को बचपन से पहाड़ों व जंगलों से प्यार है. ओड़िशा सरकार के पर्वतारोहण कोर्स के दौरान दलाइ की मुलाकात बछेंद्री पाल से हुई.

बछेंद्री पाल ने दलाइ की फूर्ती व क्लाइंबिंग की शैली को देखते हुए अपनी एवरेस्ट एक्सपीडिशन टीम में शामिल कर लिया. हाल ही में स्वर्णलता दलाइ ने अंकागुआ एक्सपीडिशन लौटी है.

जब स्वर्णलता ने पर्वतारोहण की शुरुआत की थी तो उनके गांव मुहल्ले के लोग कहते थे कि लड़कों वाले काम करने से कोई लड़का नहीं हो जायेगा.

लेकिन जब उनको थोड़ी सी प्रसिद्धि मिली तो वही लोग लाइन लगाकर स्वर्णलता से मिलने आते हैं. स्वर्णलता ने बताया कि उनके प्राचार्य ने भी कहा था कि क्या है पर्वतारोहण. इसको करने से क्या होगा. स्वर्णलता के परिवार में माता-पिता के अलावा तीन बहनें व भाई उमाकांत हैं.

कई चोटियों को फतह कर चुके हैं उत्तरकाशी के संदीप टोलिया

2018 एवरेस्ट एक्सीडिशन में टीएसएएफ के संदीप टोलिया तीसरे पर्वतारोही के रूप में हिस्सा लेंगे. उत्तरकाशी के संदीप का टीएसएएफ में पिछले दस साल से नाता है.

उन्होंने एडवांस व बेसिक माउंटेयरिंग कोर्स किया है. इसके अलावा अलावा वह नेशनल आउटडोर लीडरशिप कोर्स भी कर चुके हैं. उन्होंने कई एक्सपीडिशन में भी भाग लिया है. संदीप भागीरथी, रुदुगैरा, कनामो, स्टोक कांगरी, कराकोरम पास की चोटियों तक पहुंच चुके हैं.

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