जमशेदपुर में डेंगू से युवक की मौत, टीएमएच में तोड़फोड़, हंगामा

Updated at : 02 Sep 2017 11:30 PM (IST)
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जमशेदपुर में डेंगू से युवक की मौत, टीएमएच में तोड़फोड़, हंगामा

जमशेदपुर : डेंगू से पीड़ित गोलमुरी (नामदा बस्ती) निवासी प्रीतम श्रीवास्तव उर्फ निक्की (18) की शनिवार सुबह टीएमएच में मौत हो गयी. परिजनों व बस्तीवासियों ने चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल में तोड़फोड़ की. अस्पताल के पुराने वार्ड की ओर जानेवाले रास्ते के शीशे, गमले तोड़ दिये और जीएम […]

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जमशेदपुर : डेंगू से पीड़ित गोलमुरी (नामदा बस्ती) निवासी प्रीतम श्रीवास्तव उर्फ निक्की (18) की शनिवार सुबह टीएमएच में मौत हो गयी. परिजनों व बस्तीवासियों ने चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए अस्पताल में तोड़फोड़ की. अस्पताल के पुराने वार्ड की ओर जानेवाले रास्ते के शीशे, गमले तोड़ दिये और जीएम दफ्तर पर भी हमला बोल दिया.

अस्पताल के महाप्रबंधक डॉ राजन चौधरी और अन्य चिकित्सकों के साथ भी धक्का-मुक्की की. परिजनों व बस्तीवासियों का कहना था कि मरीज की मौत के बाद उसे डॉक्टरों ने आइसीयू में शिफ्ट किया और मृत घोषित कर दिया. समय पर उसका इलाज हो जाता, तो उसे बचाया जा सकता था.

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बाद में बिष्टुपुर थाना प्रभारी श्रीनिवासन टीएमएच पहुंचे. पुलिस के पहुंचने पर मामला शांत हुआ. मौके पर कांग्रेस नेता आनंद बिहारी दुबे भी पहुंचे थे. श्री दुबे ने पूरे मामले की जांच की मांग की. इस मामले में मृतक के पिता संतोष श्रीवास्तव के बयान पर बिष्टुपुर थाना में मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है.

मृतक के पिता संतोष श्रीवास्तव ने बताया कि प्रीतम (सबसे छोटा बेटा) की तबीयत खराब होने पर 29 अगस्त को दोपहर में उसे टीएमएच ले गया. उसे वार्ड 6ए के बेड नं 12 में भर्ती कराया. चिकित्सकों ने बताया कि उसे डेंगू है. खून और पानी चढ़ाया गया. 1 सितंबर को अचानक पेट में दर्द हुआ, तो डॉक्टर ने उसकी नाक में पाइप लगा कर गैस निकालने की कोशिश की.

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उसी रात करीब 8 बजे से पेट में काफी दर्द हुआ और वह चिल्लाने लगा. तब वे चिकित्सक के पास गये, लेकिन कोई नहीं मिला. एक नर्स मरीज को देखने आयी. नर्स ने कहा कि मरीज को इंजेक्शन दे दिया गया है, उसे कुछ नहीं होगा. उस समय डॉ चटर्जी और एक और डॉक्टर (जिसका नाम नहीं जानते) ड्यूटी पर थीं. डॉक्टर 15 मिनट बाद आयी और कहा कि जो दवा दी गयी है, वही चलेगी.

जब रोगी की स्थिति बिगड़ने लगी तब सीनियर डॉक्टर को बुलाया गया. सीनियर डॉक्टर ने कहा कि मरीज सांस लेने में दिक्कत हो रही है, 15 हजार रुपये लगेंगे. मरीज के सामने ही यह बात हो रही थी यह सुनकर रोगी गिर गया और बेहोश हो गया. उसकी वहीं मौत हो गयी. इसके बाद चिकित्सकों ने सीने पर पंप किया और मरने के बाद उसे आइसीयू में ले गये. पिता ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में इलाज में लापरवाही बरतने की वजह से उनके बेटे की मौत हो गयी.

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