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ब्लू व्हेल चैलेंज : 50वें दिन गेम ओवर

जमशेदपुर. ब्लू व्हेल गेम एक परेशानी बनता जा रहा है. भारत सहित पूरी दुनिया में इस गेम के चलते बच्चों और व्यस्कों की मौत की खबरें आ रही हैं. सभी को ये पता है कि इस गेम में 50 दिन में 50 काम करने होते हैं और 50वें दिन का काम सुसाइड करना होता है. […]

जमशेदपुर. ब्लू व्हेल गेम एक परेशानी बनता जा रहा है. भारत सहित पूरी दुनिया में इस गेम के चलते बच्चों और व्यस्कों की मौत की खबरें आ रही हैं. सभी को ये पता है कि इस गेम में 50 दिन में 50 काम करने होते हैं और 50वें दिन का काम सुसाइड करना होता है.
गेम की शुरुआत में अजीबोगरीब काम दिये जाते हैं, जैसे शुरुआत में कोई अजीब गाना सुनना, रात में जागना और धीरे-धीरे ये खुद को नुकसान पहुंचाने की लिमिट पर पहुंच जाता है. ब्लू व्हेल चैलेंज ने दुनियाभर में 250 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है. इनमें अकेले रूस में 130 से ज्यादा मौतें हुई हैं.

इसके अलावा पाकिस्तान और अमेरिका समेत 19 देशों में इस गेम की वजह से खुदकुशी के कई मामले सामने आये हैं. ब्लू व्हेल गेम नाम का गेम रूस में बनाया गया है. इसे फिलिप बुडेकिन नाम के शख्स ने 2013 में बनाया था. इस गेम के जरिये रूस में सुसाइड का पहला मामला 2015 में सामने आया था. 2016 में कई सुसाइड केस सामने आने के बाद फिलिप वुडकिन को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था. जब वुडकिन को गिरफ्तार किया गया, उस दौरान कुछ समय के अंतराल में 15 बच्चों ने आत्महत्या की थी.

वुडकिन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने पांच बच्चों को जान देने से भी बचाया भी था. पुलिस ने जब वुडकिन से पूछताछ की, तो पता चला कि वह एक मनोविज्ञान का छात्र है और उसी ने इस खूनी गेम का अविष्कार किया है. वुडकिन ने पुलिस को बताया कि उसका मकसद समाज की सफाई करना है, जो अपने जीवन का मूल्य नहीं समझते वो समाज के लिए कचरा हैं और उनकी सफाई करना जरूरी है. यह भी बताया जा रहा है कि इस गेम का मास्टर माइंड रूस का इल्या सिडोरोव नाम का एक पोस्टमैन है. आरोपी पोस्टमैन को बच्चों को जान देने के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था.
सीबीएसइ ने स्कूलों को ब्लू व्हेल गेम को लेकर जारी किया है गाइड लाइन : ब्लू व्हेल गेम को लेकर हो रही घटना को देखते हुए 20 अगस्त को सीबीएसइ ने भी सभी स्कूलों को गाइड लाइन जारी किया है. इसके तहत स्कूल में बच्चों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग के बारे में जानकारी देने को कहा गया है. साथ ही स्मार्ट फोन, टैबलेट, मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के स्कूल लाने पर प्रतिबंध लगा दिया है. वहीं उल्लंघन करने वाले के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिये कहा है, जिससे छात्रों को ब्लू व्हेल जैसे गेम से दूर रखा जा सके.
ऐसे बच्चों के पास पहुंचता है गेम
दुनिया के कई देशों में पहुंचने वाला यह गेम सोशल मीडिया के जरिये लोगों तक पहुंचता है. इसे वीकॉनटेकटे नाम की सोशल साइट पर बनाया गया है, जोकि रूस की सबसे लोकप्रिय सोशल नेटवर्किंग साइट है. गेम की तलाश में जब कोई इस वेबसाइट पर अपना अकाउंट बनाता है, तो उसे ब्लू व्हेल सर्च करने पर सैकड़ों तस्वीरें, मैसेज और ग्रुप सामने आ जाते हैं. ये ग्रुप डिप्रेस करने वाले संदेशों से भरे होते हैं. जिनमें भूत के स्केच, खून बहने की तस्वीरें हाथ की नस काटने और खुद को घायल करने की तस्वीरें मिलती हैं.
पढ़ने में ठीक, लेकिन मोबाइल गेम्स का एडिक्ट था फरदीन
चाचा गुलरेज खान ने बताया कि फरदीन उनके बड़े भाई का इकलौता बेटा था. फरदीन के साथ पढ़ने वाले बच्चों का कहना है कि वह पढ़ने में बहुत अच्छा था. लेकिन इस बार उसने मन लगाकर पढ़ाई नहीं की थी, जिस कारण उसका रिजल्ट अच्छा नहीं हुआ था. हालांकि रिजल्ट को लेकर वह परेशान नहीं था. वह टेंशन फ्री होकर पढ़ाई करता था. स्कूल में किसी स्टूडेंट से कोई विवाद भी नहीं था. फरदीन के परिजनों और दोस्तों ने यह भी बताया कि उसे मोबाइल गेम बहुत पसंद था. अधिकांश समय वह खाली बैठकर गेम्स खेलता रहता था. उसे कंप्यूटर की भी अच्छी जानकारी थी. मोबाइल गेम के एडिक्शन के कारण पुलिस ब्लू व्हेल गेम के एंगल से भी जांच कर रही है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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