मस्तक का तिलक हमारी सांस्कृतिक पहचान : मुनि श्री

Published by : SUNIL PRASAD Updated At : 10 Jun 2026 10:42 PM

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पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा बाजार मंदिर में धर्मसभा का आयोजन

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हजारीबाग. परम पूज्य आचार्य श्री समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री भाव सागर जी महाराज के सान्निध्य में बुधवार की सुबह पारसनाथ दिगंबर जैन बड़ा बाजार मंदिर में धर्मसभा का आयोजन किया गया. धर्मसभा में मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज ने बताया कि हम प्रत्येक क्रिया अच्छे ढंग से करेंगे, तो हमारा जीवन अच्छा बनेगा. उन्होंने कहा कि मस्तक के मध्य भाग पर दोनों भौंहों के बीच लगाया जाने वाला चिह्न तिलक कहलाता है. इसे आज्ञा चक्र का स्थान माना गया है. यह शरीर का सबसे संवेदनशील ऊर्जा केंद्र है. तिलक को पुण्य चिह्न कहा जाता है. केसर-चंदन का तिलक शीतल होता है. यह याद दिलाता है कि स्वभाव शांत और अहिंसक रहे. मंदिर में अभिषेक पूजन से पहले तिलक लगाया जाता है. यह मन की शुद्धि का प्रतीक है. माथे पर केसर का तिलक शौर्य का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि तिलक हमारी सांस्कृतिक पहचान है. मीडिया हेड विजय जैन लुहाड़िया ने बताया कि मुनि श्री के आने से श्रावक को धर्म लाभ प्राप्त हो रहा है. 11 जून को मुनि श्री का प्रातः मंगल प्रवचन होगा. संध्या में महाआरती, णमोकार पाठ व जाप हुआ. मुनि श्री दर्शन के लिए पारस भवन बड़ा बाजार में विराजमान हैं.

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