दनुआ घाटी में मवेशियों से हादसों का खतरा

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दनुआ घाटी में मवेशियों से हादसों का खतरा

एनएच-टू पर सियरकोनी कट से दनुआ मस्जिद के बीच अक्सर हादसे

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चौपारण. एनएच-टू पर दनुआ घाटी अब एक्सीडेंटल जोन के नाम से प्रसिद्ध हो चुका है. हालांकि एनएचएआइ ने इसे आधिकारिक रूप से एक्सीडेंटल जोन घोषित नहीं किया है, लेकिन वाहन चालक से लेकर आम लोग इसे इसी नाम से जानते हैं. सियरकोनी कट से दनुआ मस्जिद के बीच अक्सर वाहन दुर्घटनाएं होती रही हैं. इन दुर्घटनाओं का एक मुख्य कारण जीटी रोड पर मवेशियों का बैठना है. बरसात के मौसम में रात के समय मवेशी जंगल से निकलकर रोड पर बैठ जाते हैं. तेज रफ्तार से घाटी में उतरने वाले वाहन इनकी चपेट में आ जाते हैं. कई बार दर्जनों मवेशियों की मौत हो चुकी है और गाड़ियां असंतुलित होकर पलट गयी हैं. लोहाबर से चोरदाहा के बीच जीटी रोड के आसपास कई गांव हैं, जहां पशुपालक मवेशी पालते हैं. अधिकांश पशुपालक सुबह मवेशी को जंगल में छोड़ देते हैं और शाम को यह भी नहीं देखते कि वे लौटे या नहीं. यही मवेशी रात में सड़क पर बैठ जाते हैं, जिससे हादसों का खतरा बढ़ जाता है. थाना प्रभारी चौपारण सरोज सिंह चौधरी ने कहा कि पशुपालक मवेशियों की देखरेख करें और उन्हें जंगल के भरोसे न छोड़ें. सड़क पर लावारिश हालत में मिले मवेशियों के मालिक पर नियम के अनुसार कार्रवाई होगी.

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