चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के भरोसे हजारीबाग के भू-अर्जन कार्यालय में कोर्ट का काम, 15 लाख की अग्रिम निकासी पर उठ रहा सवाल

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Hazaribagh News

शहर के झील रोड स्थित जल संसाधन विभाग परिसर में विशेष भू-अर्जन तेनुघाट परियोजना कार्यालय. फोटो: प्रभात खबर

Hazaribagh News: हजारीबाग के विशेष भू-अर्जन तेनुघाट परियोजना कार्यालय में चतुर्थवर्गीय कर्मचारी को कोर्ट का काम सौंपे जाने और छह वर्षों में 15 लाख रुपये से अधिक की अग्रिम निकासी पर सवाल उठे हैं. मामले में जांच की मांग तेज हो गई है.

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हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट

Hazaribagh News: झारखंड के जल संसाधन विभाग, उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के मुख्यालय हजारीबाग स्थित मुख्य अभियंता प्रक्षेत्र के अधीन विशेष भू-अर्जन तेनुघाट परियोजना कार्यालय में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि कोर्ट से जुड़े कामों की देखरेख विभागीय नियमों के विपरीत कराई जा रही है. इसके साथ ही, कोर्ट संबंधी कार्यों के नाम पर पिछले छह वर्षों में 15 लाख रुपये से अधिक की सरकारी राशि अग्रिम (एडवांस) के रूप में निकाली गई है, जिससे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है.

जनवरी 2021 में रिटायर हो गए थे टंकक ब्रजकिशोर सिन्हा

जानकारी के अनुसार, जनवरी 2021 में विशेष भू-अर्जन तेनुघाट परियोजना कार्यालय में कार्यरत टंकक ब्रजकिशोर सिन्हा के सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायालय से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी किसी नियमित लिपिकीय कर्मचारी को देने के बजाय एक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी को सौंप दी गई. विभागीय नियमों की अनदेखी कर वर्षों से इसी व्यवस्था के तहत न्यायालय संबंधी कामकाज संचालित होने की बात सामने आई है.

छह वर्षों में 15 लाख रुपये से अधिक की अग्रिम निकासी

सूत्रों के अनुसार वर्ष 2021 से अब तक न्यायालय से जुड़े कार्यों के संचालन के नाम पर लगभग 15 लाख रुपये से अधिक की सरकारी राशि अग्रिम के रूप में निकाली गई है. यह राशि किस मद में, किन परिस्थितियों में और किस प्रकार खर्च की गई, इसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. विभागीय प्रक्रिया का पालन किए बिना सरकारी धन के उपयोग की आशंका व्यक्त की जा रही है. मामले को लेकर यह भी कहा जा रहा है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न जिलों में सामने आए ट्रेजरी घोटाले जैसी वित्तीय अनियमितताओं की तरह यहां भी सरकारी राशि के गबन अथवा दुरुपयोग से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं.

950 करोड़ रुपये की परियोजनाओं से जुड़ा है कार्यालय

विशेष भू-अर्जन तेनुघाट परियोजना कार्यालय का दायरा काफी व्यापक है. इसकी स्थापना वर्ष 1965-66 में तेनुघाट परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण कार्यों के उद्देश्य से की गई थी. बाद में इसके कार्यक्षेत्र का विस्तार किया गया. वर्तमान में यह कार्यालय कोडरमा और गिरिडीह की सीमा पर प्रस्तावित पंचखेरो जलाशय योजना, हजारीबाग, गिरिडीह और बोकारो के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित कोनार डैम तथा रामगढ़ जिले की भैरवा जलाशय योजना से प्रभावित रैयतों को मुआवजा, पुनर्वास और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का दायित्व निभाता है. इन तीनों परियोजनाओं का संयुक्त बजट लगभग 950 करोड़ रुपये है. इनमें पंचखेरो जलाशय योजना का बजट 200 करोड़ रुपये से अधिक, भैरवा जलाशय योजना का बजट 500 करोड़ रुपये से अधिक तथा कोनार डैम परियोजना का बजट लगभग 250 करोड़ रुपये से अधिक बताया जाता है.

कई मामलों की सुनवाई कोर्ट में

भूमि अधिग्रहण और मुआवजा से असंतुष्ट अनेक रैयत कोर्ट की शरण में पहुंचे हैं. ऐसे में न्यायालय से जुड़े मामलों का निष्पादन इस कार्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है. इसी कारण कोर्ट संबंधी कार्यों में पारदर्शिता और नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक माना जाता है. लेकिन एक चतुर्थवर्गीय कर्मचारी को इस प्रकार की जिम्मेदारी सौंपे जाने और उसी के माध्यम से वित्तीय लेन-देन होने पर सवाल उठ रहे हैं.

वर्षों से खाली है स्थायी भू-अर्जन पदाधिकारी का पद

विशेष भू-अर्जन तेनुघाट परियोजना कार्यालय में लंबे समय से स्थायी भू-अर्जन पदाधिकारी की नियुक्ति नहीं हुई है. अधिकांश समय प्रभारी भू-अर्जन पदाधिकारी के भरोसे कार्यालय का संचालन किया गया. बीते 27 मई को तत्कालीन प्रभारी भू-अर्जन पदाधिकारी का स्थानांतरण हो गया, जिसके बाद भूमि सुधार उपसमाहर्ता राजकिशोर प्रसाद को प्रभारी भू-अर्जन पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया. उन्होंने 24 जून को कार्यालय का कार्यभार ग्रहण किया है.

प्रधान लिपिक ने क्या कहा

विशेष भू-अर्जन तेनुघाट परियोजना कार्यालय के प्रधान लिपिक सुभाष चंद्र मंडल ने बताया कि उनकी पोस्टिंग लगभग तीन साल पहले हुई है. उन्होंने कहा कि चतुर्थवर्गीय कर्मचारी एवं चेनमैन (जंजीर वाहक) राजा राम सिंह पहले से न्यायालयवाद के प्रभारी के रूप में कार्य कर रहे हैं. आवश्यकता के अनुसार उन्हें सरकारी राशि अग्रिम के रूप में उपलब्ध कराई गई है. उन्होंने यह भी कहा कि इस व्यवस्था की जानकारी विभाग को है.

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अधीक्षण अभियंता ने जांच का दिया भरोसा

मुख्य अभियंता प्रक्षेत्र के अधीक्षण अभियंता प्रकाश चंद्र बिरुवा ने कहा कि न्यायालय से जुड़े कार्य चतुर्थवर्गीय कर्मचारी से कराए जाने और सरकारी राशि के अग्रिम भुगतान से संबंधित मामले को गंभीरता से संज्ञान में लिया जाएगा. उन्होंने संकेत दिया कि पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी. इस बीच विभागीय कार्यप्रणाली और सरकारी धन के उपयोग को लेकर उठे सवालों ने विशेष भू-अर्जन तेनुघाट परियोजना कार्यालय की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं. अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कराता है या नहीं और यदि जांच होती है तो उससे कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं.

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Kumarvishwat Sen

लेखक के बारे में

By Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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