बाल सुधार गृह में नाबालिग ने काटा गला, अस्पताल में भर्ती, खतरे से बाहर

Published by : VIKASH NATH Updated At : 12 Sep 2025 8:35 PM

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लोहसिंघना थाना क्षेत्र स्थित हजारीबाग बाल सुधार गृह में शुक्रवार सुबह एक नाबालिग ने अपना गला काट लिया.

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हजारीबाग. लोहसिंघना थाना क्षेत्र स्थित हजारीबाग बाल सुधार गृह में शुक्रवार सुबह एक नाबालिग ने अपना गला काट लिया. घायल को तुरंत शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे खतरे से बाहर बताया. बाद में मनोचिकित्सक द्वारा उसकी काउंसलिंग की गयी. जानकारी के अनुसार, 11 सितंबर को गिरिडीह जिले से एक नाबालिग को हजारीबाग बाल सुधार गृह लाया गया था. उस पर एक लड़की पर जबरन सिंदूर देने का आरोप है. शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने उसे सुधार गृह भेज दिया था. बताया जाता है कि इस घटना के बाद से नाबालिक मानसिक रूप से काफी परेशान चल रहा था. शुक्रवार की सुबह जीर्णोद्धार कार्य के दौरान बिखरे पड़े टाइल्स के टुकड़े को लेकर वह शौचालय में चला गया. अंदर जाकर उसने टूटे टाइल्स से गले पर वार कर लिया. सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत उसे बाहर निकाल अस्पताल पहुंचाया. फिलहाल बच्चा खतरे से बाहर है, लेकिन बोलने की स्थिति में नहीं है. चिकित्सकों ने कहा कि स्वस्थ होने के बाद उसे वापस सुधार गृह भेज दिया जायेगा. नहाय खाय के साथ जितिया पर्व शुरू, कल निर्जला उपवास बड़कागांव. 13 सितंबर से जितिया पर्व की शुरुआत नहाय-खाय के साथ हुई. यह पर्व माताओं द्वारा संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और यशस्वी जीवन की कामना के लिए मनाया जाता है. माताएं नदी, तालाब और कुएं में स्नान कर व्रत आरंभ करती हैं. 14 सितंबर को निर्जला उपवास रखकर जीतवाहन देवता की पूजा की जाती है और पौराणिक कथाएं सुनी जाती हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत से संतान वियोग नहीं होता. यह पर्व तीन दिन तक चलता है—पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन उपवास और तीसरे दिन पारण होता है. पर्व को लेकर बाजारों में रौनक है. महिलाएं साड़ी, चूड़ी, गहनों और सौंदर्य प्रसाधनों की खरीदारी कर रही हैं। बड़कागांव डेली मार्केट में चांदी-सोने के आभूषणों की बिक्री बढ़ गयी है. जितिया से एक दिन पहले माताएं मड़ुआ की रोटी और नेनुआ की सब्जी खाती हैं. मान्यता है कि यह भोजन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है. पर्व को लेकर सब्जियों की मांग में भारी वृद्धि हुई है. जितिया न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी उत्सव है.

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