हजारीबाग. कनहरी पहाड़ क्षेत्र को जैव विविधता धरोहर स्थल घोषित किया गया है. इसे जिले में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है. यह मान्यता जैव विविधता अधिनियम 2002 के तहत प्रदान की गयी है. यह झारखंड का पहला जैव विविधता धरोहर स्थल है. कनहरी जैव विविधता धरोहर स्थल कुल 2110.67 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है, जो अपनी समृद्ध प्राकृतिक संपदा और दुर्लभ वन्य जीवों के लिए जाना जाता है. इस पहल से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, जलवायु संतुलन बेहतर होगा और स्थानीय लोगों की आजीविका के नये साधन विकसित होंगे. कनहरी पहाड़ का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. पूर्वी वन प्रमंडल के डीएफओ विकास उज्जवल ने बताया कि कनहरी पहाड़ क्षेत्र में सखुआ (साल) के घने जंगल पाये जाते हैं, जो इस इलाके की पारिस्थितिकी को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. यहां जैव विविधता अत्यंत समृद्ध है. वन्य प्राणियों में बज्रकीट, साहिल, अजगर, जंगली खरगोश, नेवला और जंगली सूअर जैसे जीव पाये जाते हैं. ये प्रजातियां इस क्षेत्र की पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.
वन्य जीवों और वनस्पतियों की रक्षा होगी : डीएफओ
डीएफओ ने बताया कि धरोहर स्थल घोषित होने के बाद क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण को लेकर विशेष प्रयास किये जायेंगे. अवैध कटाई, शिकार और अतिक्रमण पर सख्ती से रोक लगेगी. स्थानीय समुदायों को संरक्षण कार्यक्रमों से जोड़ा जायेगा, ताकि वे प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा में भागीदार बन सकें. डीएफओ ने बताया कि जैव विविधता धरोहर स्थल का दर्जा मिलने से कनहरी पहाड़ को कानूनी संरक्षण मिलेगा. इससे न केवल वन्य जीवों और वनस्पतियों की रक्षा होगी, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी मजबूत होगा. यह क्षेत्र अनुसंधान, शिक्षा और प्रकृति अध्ययन के लिए भी एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभरेगा. डीएफओ ने कहा कि भविष्य में यहां इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने, प्रकृति पथ विकसित करने और जैव विविधता जागरूकता केंद्र स्थापित करने की योजना है. साथ ही स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर भी ध्यान दिया जायेगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

