हजारीबाग में तरंग ग्रुप की अनोखी पहल, नशामुक्त रामनवमी मनाने के लिए नुक्कड़ नाटक

हजारीबाग के एक घर में नुक्कड़ नाटक करते तरंग ग्रुप से जुड़े कलाकार. फोटो: प्रभात खबर
Hazaribagh Ram Navami: हजारीबाग में तरंग ग्रुप ने नुक्कड़ नाटक के जरिए नशामुक्त रामनवमी मनाने का अनोखा अभियान शुरू किया. कलाकारों ने लोगों को नशे और फूहड़ता से दूर रहकर मर्यादित व सौहार्दपूर्ण तरीके से त्योहार मनाने का संदेश दिया, जिसे स्थानीय लोगों ने सराहा. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट
Hazaribagh Ram Navami: झारखंड के हजारीबाग में इस बार रामनवमी का उत्सव केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी एक सशक्त माध्यम बनता नजर आ रहा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध रामनवमी पर्व के अवसर पर शहर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूबा हुआ है. हर गली-मोहल्ले में भगवान श्रीराम के जयकारे गूंज रहे हैं और खासकर युवाओं में त्योहार को लेकर उत्साह चरम पर है. खास बात यह है कि इस बार की रामनवमी को नशामुक्त तरीके से मनाने के लिए तरंग ग्रुप के युवाओं ने अनोखी पहल की शुरुआत की है. वे गली-मोहल्लों में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता अभियान चला रहे हैं.
गुरुवार से जागरूकता अभियान की हुई शुरुआत
हजारीबाग के तरंग ग्रुप ने एक अनोखी पहल करते हुए 19 मार्च से नशामुक्त रामनवमी को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया है. यह अभियान शहर के विभिन्न इलाकों में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से चलाया जा रहा है. कलाकारों की टोली आम लोगों के बीच जाकर संदेश दे रही है कि त्योहार की गरिमा बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है. नाटक के दौरान कलाकारों ने प्रभावशाली नारों और संवादों के जरिए लोगों को झकझोरने की कोशिश की. “देखो ऐ दीवानो, तुम ये काम ना करो, राम का नाम बदनाम ना करो…” जैसे गीतों के माध्यम से नशे से दूर रहने की अपील की गई.
अभियान का उद्देश्य: परंपरा और मर्यादा का संरक्षण
तरंग ग्रुप के निर्देशक अमित कुमार गुप्ता ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि रामनवमी केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि मर्यादा, अनुशासन और सम्मान का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि नशामुक्त, सौहार्दपूर्ण और पारंपरिक तरीके से जुलूस निकालना ही इस पर्व की असली पहचान है. उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि राम का नाम सम्मान का प्रतीक है, जबकि नशा उस सम्मान को ठेस पहुंचाता है. इसलिए समाज के हर वर्ग को मिलकर इस दिशा में प्रयास करना चाहिए.
नाटक के माध्यम से सामाजिक संदेश
नुक्कड़ नाटक में कलाकारों ने यह दिखाया कि किस तरह नशा और अश्लीलता त्योहारों की पवित्रता को प्रभावित करते हैं. इसके साथ ही उन्होंने यह भी दर्शाया कि भाईचारे, अनुशासन और मर्यादा के साथ मनाया गया पर्व ही भगवान श्रीराम की शिक्षाओं का सही पालन है. कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों पर गहरा प्रभाव छोड़ा. उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि रामनवमी केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाने का एक अवसर भी है.
महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा पर विशेष जोर
इस अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाना भी है. कलाकारों ने अपने प्रदर्शन के जरिए यह संदेश दिया कि त्योहार के दौरान महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण बनाना समाज की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि जब तक समाज में महिलाओं को बराबरी का सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक किसी भी पर्व का असली महत्व अधूरा रहेगा.
स्थानीय लोगों का मिला भरपूर समर्थन
तरंग ग्रुप की इस पहल को स्थानीय लोगों से भी काफी सराहना मिल रही है. लोगों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. स्थानीय नागरिकों ने कहा कि नशामुक्त और मर्यादित तरीके से त्योहार मनाने का संदेश आज के समय में बेहद जरूरी है, खासकर युवाओं के लिए.
कलाकारों की टीम ने निभाई अहम भूमिका
इस जागरूकता अभियान में तरंग ग्रुप के कई कलाकार सक्रिय रूप से शामिल हैं. इनमें सलीम खान, मनोज कुमार, अमिताभ श्रीवास्तव, अमित कुशवाहा, दीपक झा, अगस्त्य कुमार, महेश कुमार, शिवानी प्रिया, अनीता कुमारी और माधुरी सहित अन्य कलाकारों ने अपनी भूमिका निभाई. सभी कलाकारों ने अपने अभिनय और संदेश के माध्यम से लोगों के दिलों तक पहुंचने की कोशिश की और समाज को एक सकारात्मक दिशा देने का प्रयास किया.
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युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बना अभियान
तरंग ग्रुप का यह प्रयास खासकर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बन रहा है. यह अभियान न केवल रामनवमी के महत्व को सही दिशा में प्रस्तुत कर रहा है, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का भी बोध करा रहा है. अंततः यह कहा जा सकता है कि हजारीबाग में चलाया जा रहा यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने की एक सार्थक पहल है. अगर ऐसे प्रयास लगातार होते रहें, तो निश्चित रूप से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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