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किसानों को नहीं मिला समुचित मुआवजा

Updated at : 09 Jul 2025 11:31 PM (IST)
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किसानों को नहीं मिला समुचित मुआवजा

प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता ने कहा

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हजारीबाग. झारखंड विस्थापित संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष सह पूर्व सांसद भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि सरकार द्वारा किये जा रहे भूमि अधिग्रहण से सबसे अधिक प्रभावित गरीब, दलित और आदिवासी किसान हो रहे हैं. सरकारी व निजी उपक्रमों की परियोजनाओं के कारण हजारों गांव उजड़ चुके हैं. जमीन छीनने के बाद भी किसानों को समुचित मुआवजा नहीं मिला. न ही रोजगार और पुनर्वास की व्यवस्था की गयी. श्री मेहता झारखंड में जमीन की लूट और विस्थापन से जुड़े मुद्दे को लेकर हजारीबाग शहर के देवांगना चौक स्थित होटल भंडारा पार्क में बुधवार को अखिल भारतीय किसान सभा के पत्रकार वार्ता में बोल रहे थे. उन्होंने तत्कालीन रघुवर दास सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि लगान की रसीद काटने के बावजूद नाम दर्ज नहीं किया गया. जो गैर मजरूआ जमीन वर्षों से किसानों के दखल कब्जे में थी. जिस पर वह खेती कर अपने परिवार का जीविकोपार्जन कर रहे थे, वैसी जमीनों को कब्जे में ले लिया. जिससे वह पूरी तरह बेरोजगार और बेघर हो गये. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भूमि बैंक से किसानों की जमीन रिलीज करने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक नहीं हो पाया. भूमि अधिग्रहण में अब तक लगभग 45 लाख किसान विस्थापित हो चुके हैं. विस्थापन की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सरकार के पास अब तक कोई समुचित आंकड़ा नहीं है.

झारखंड में विस्थापन अभिशाप बन गया है : केडी सिंह

अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव केडी सिंह ने कहा कि झारखंड राज्य गठन को 24 वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक न तो कोई समुचित विस्थापन और पुनर्वास नीति बन पायी है. न ही भूमि अधिग्रहण कानून 2013 को सही ढंग से लागू किया गया है. उन्होंने कहा कि विस्थापन झारखंड का अभिशाप बन गया है. विस्थापन का दंश दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोगों को झेलना पड़ा रहा है. किसानों के नाम बंदोबस्त गैरमजरूआ जमीन को रिलीज कर उन्हें वापस दिलायी जाये. झारखंड में विस्थापन आयोग का गठन हो, ताकि पूर्व के विस्थापितों का लेखा-जोखा हो सके.

विस्थापितों के हक के लिए लड़ाई जारी रहेगी : बटेश्वर

झारखंड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच के प्रदेश अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि विस्थापन झारखंड की एक गंभीर समस्या है. दलित किसान और आदिवासी समाज से उनकी जमीन छीनी जा रही है. पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता के नेतृत्व में विस्थापन की लड़ाई जारी रहेगी. मौके पर खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मो हकीम अंसारी, श्रीकांत मेहता, कामरेड इम्तियाज अंसारी, तुलसी कुमार, अनंत कुमार आर्या, सुनीता कुमारी, मजीद अंसारी, अनंत कुमार आर्या सहित वामपंथी दलों के नेता मौजूद थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUNIL PRASAD

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SUNIL PRASAD is a contributor at Prabhat Khabar.

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