कम अवधि वाली फसलों की खेती करने की सलाह
Published by : SUNIL PRASAD Updated At : 26 May 2026 9:28 PM
जलवायु परिवर्तन के प्रभाव पर कृषि कार्यशाला आयोजित
चलकुशा. प्रखंड सभागार में संभावित सुखाड़ से निपटने को लेकर एक दिवसीय विशेष कृषि खरीफ फसल कार्यशाला आयोजित की गयी. अध्यक्षता बीडीओ अमृता सिंह ने की. संचालन बीटीएम संजय यादव ने किया. कार्यशाला में वैश्विक जलवायु परिवर्तन और अल नीनो के प्रभाव से किसानों को आगाह किया गया. बताया गया कि प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति को अल नीनो कहा जाता है, जिससे मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है. बीटीएम संजय यादव ने कहा कि संभावित संकट से निपटने के लिए किसानों को पारंपरिक खेती के तौर-तरीकों में बदलाव करना होगा. उन्होंने कम बारिश की स्थिति में अधिक पानी वाली धान फसल के बजाय कम अवधि में तैयार होने वाली धान और मोटे अनाज जैसे मड़ुआ, ज्वार और बाजरा की खेती को प्राथमिकता देने की सलाह दी. कार्यशाला में जल संरक्षण और मिट्टी की नमी बचाने के लिए मल्चिंग तकनीक, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली के उपयोग पर चर्चा की गयी. साथ ही खेतों की मेड़बंदी मजबूत करने तथा जल संचयन के लिए छोटे तालाब और डोभा निर्माण पर जोर दिया गया. कृषि पदाधिकारी ने किसानों से सरकार की ओर से मिलने वाले आकस्मिक बीज और सिंचाई यंत्रों पर सब्सिडी योजना का लाभ उठाने की अपील की. मौके पर जिप सदस्य सविता सिंह, बीस सूत्री अध्यक्ष सह झामुमो प्रखंड अध्यक्ष सलीम अंसारी, सांसद प्रतिनिधि अजय सिंह, मुखिया संघ अध्यक्ष आलोक सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि और किसान मौजूद थे.
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