79 साल बाद कृषि अनुसंधान संस्थान गौरिया आया

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हजारीबाग : केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि 79 साल बाद गौरिया करमा कृषि अनुसंधान संस्थान पूषा वापस गौरिया आया है. यह कृषि अनुसंधान संस्थान का दूसरा रूप होगा. यह संस्थान पूर्वी भारत के यूपी, बिहार, झारखंड, ओड़िशा, बंगाल सहित पूर्वी राज्यों के लिये वरदान साबित होगा. कृषि मंत्री ने सोमवार को […]

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हजारीबाग : केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि 79 साल बाद गौरिया करमा कृषि अनुसंधान संस्थान पूषा वापस गौरिया आया है. यह कृषि अनुसंधान संस्थान का दूसरा रूप होगा.
यह संस्थान पूर्वी भारत के यूपी, बिहार, झारखंड, ओड़िशा, बंगाल सहित पूर्वी राज्यों के लिये वरदान साबित होगा. कृषि मंत्री ने सोमवार को हजारीबाग स्थित केंद्रीय वर्षा आश्रित चावल अनुसंधान केंद्र में कृषि वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों के साथ बैठक में ये बातें कहीं.
बैठक में केंद्र व राज्य सरकार के अधिकारी शामिल हुए. झारखंड सरकार ने इस संस्थान के लिये हजारीबाग के गौरिया करमा में 1000 एकड़ जमीन उपलब्ध करायी है. संस्थान खोलने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्रलय द्वारा प्रथम चरण में एक सौ करोड़ रुपये उपलब्ध कराये गये हैं. पूरी योजना एक हजार करोड़ रुपये की है.
केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि अंगरेज जब भारत आये तो उन्हें लगा कि भारत का विकास कृषि से होगा. इसलिये 1904 में पूषा कृषि अनुसंधान संस्थान की स्थापना एकीकृत बिहार में की. 1934 में बिहार में आये भूकंप के वजह से संस्थान का भवन ध्वस्त हो गया. इसके बाद 1936 में इस संस्थान को दिल्ली ले गये. दिल्ली पूषा परिसर में इस संस्थान में सात सौ एकड़ जमीन उपलब्ध करायी गयी.
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में आबादी के बढ़ने के साथ कृषि योग्य भूमि क म हो रही है.स्वतंत्र भारत में इस तरह के संस्थान की जरूरत थी, लेकिन पिछली सरकारों ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. देश में कृषि के लिये एक अनुसंधान संस्थान से काम नहीं चलेगा. अन्य हिस्सों में पूषा जैसे संस्थान का होना जरूरी है. कृषि मंत्री ने कहा कि देश के पूर्वी हिस्से में कृषि योग्य भूमि ज्यादा है लेकिन यहां के किसान गरीब हैं. यहां के किसानों को संपन्न करने के लिये उत्पादकता बढ़ाना जरूरी है.
गौरिया करमा पूर्वी भारत के केंद्र में : केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन ने कहा कि झारखंड सरकार ने कृषि अनुसंधान संस्थान के लिये जिस स्थान पर जमीन उपलब्ध करायी है, वह स्थान पूर्वी भारत का केंद्र बिंदु है. इलाहाबाद से कोलकाता राष्ट्रीय उच्च पथ व पटना-रांची नेशनल हाइवे के केंद्र पर स्थित गौरिया करमा अनुसंधान संस्थान बिहार और झारखंड के लिये सौभाग्यशाली साबित होगा.
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