फर्जी सर्टिफिकेट पर मरीजों का इलाज करनेवाले 13 डॉक्टरों और दो मेडिकल स्टॉफ को पुलिस ने हिरासत

Published at :30 May 2018 5:46 AM (IST)
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फर्जी सर्टिफिकेट पर मरीजों का इलाज करनेवाले 13 डॉक्टरों और दो मेडिकल स्टॉफ को पुलिस ने हिरासत

हजारीबाग : फर्जी सर्टिफिकेट पर मरीजों का इलाज करनेवाले 13 डॉक्टरों और दो मेडिकल स्टॉफ को पुलिस ने हिरासत में लिया है. सभी से पूछताछ की जा रही है. सभी पर फरजी प्रमाण पत्र के आधार पर प्रैक्टिस करने का आरोप है. बताया जाता है कि पिछले तीन माह से डीसी के निर्देश पर सभी […]

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हजारीबाग : फर्जी सर्टिफिकेट पर मरीजों का इलाज करनेवाले 13 डॉक्टरों और दो मेडिकल स्टॉफ को पुलिस ने हिरासत में लिया है. सभी से पूछताछ की जा रही है. सभी पर फरजी प्रमाण पत्र के आधार पर प्रैक्टिस करने का आरोप है. बताया जाता है कि पिछले तीन माह से डीसी के निर्देश पर सभी लोगों के क्रिया कलापों की जांच की जा रही थी. इसके बाद एसडीओ आदित्य रंजन, सिविल सर्जन विजय शंकर दास की अगुवाई में पांच सदस्यीय टीम ने मंगलवार को कई क्लिनिकों में छापा मारा और इन डॉक्टरों को हिरासत में ले लिया. सभी को सदर थाना ले जाया गया.

इन चिकित्सकों के सर्टिफिकेट की जांच के लिए डॉ विजय शंकर और डॉ पीके सिन्हा को लगाया गया है. सभी के कागजात की जांच चल रही है. जांच के बाद सर्टिफिकेट फर्जी पाये जाने पर उन पर प्राथमिकी दर्ज की जायेगी. डीसी रविशंकर शुक्ला की सभा कक्ष में सभी पकड़े गये डाक्टरों व अन्य लोगों को ले जाया गया, जहां सभी से पूछताछ की गयी. बाद में सभी को सदर थाना ले जाया गया. थाना मे दंडाधिकारियों और चिकित्सकों की ओर से सर्टिफिकेट व लाइसेंस की जांच की जा रही है.
इन चिकित्सकों पर हुई कार्रवाई: डॉ अंजु आर्या, डॉ एके मेहता, डॉ पी कुमार, डॉ एसए आलम, डॉ एम आलम, डॉ सोहेल केशर, डॉ आके पांडेय, डॉ जुनैद, डॉ मृत्युंज्य कुमार सिन्हा, डॉ नजरूल इस्लाम, डॉ एमए अंसारी, डॉ रंजीत कुमार, डॉ दिलीप रवानी, दवा दुकान संचालक विकास कुमार एवं उमेश कुमार का नाम शामिल है.
कार्रवाई में ली गयी चिकित्सक की मदद: नवंबर 2017 से एमबीबीएस सर्टिफिकेट के आधार पर इलाज कर रहे चिकित्सकों को प्रशासन की ओर से चिह्नित किया गया. कार्य में आइएमए के एक चिकित्सक की मदद प्रशासन ले रही थी. सदर एसडीओ आदित्य रंजन ने चिह्नित डॉक्टरों के इलाज की पर्ची को इकट्ठा किया. एसडीओ ने इसके बाद मरीजों को चिह्नित डॉक्टरों के पास इलाज के लिए भेजा. बाद में डॉक्टर के लिखे पर्ची को मंगाया गया, फिर यह कार्रवाई की गयी.
पांच टीम ने की छापमारी: जिला प्रशासन ने फर्जी सर्टिफिकेट पर इलाज कर रहे चिकित्सकों को पकड़ने के लिए पांच टीम गठित की. टीम में कार्यपालक दंडाधिकारी कुमुद झा, मजिस्ट्रेट मधु कुमारी, दीपमाला, कटकमसांडी बीडीओ अखिलेश कुमार, कटकमदाग बीडीओ सत्येंद्र महतो छापामारी दल का नेतृत्व कर रहे थे. प्रत्येक टीम में दो डॉक्टर, एक सीडीपीओ, एक लिपिक और दो पुलिस बल के जवान शामिल थे. एक साथ छापामारी के दौरान 13 चिकित्सकों और दवा दुकान संचालकों को पकड़ा गया.
आयुष की श्रेणी में नहीं आता सर्टिफिकेट: सदर एसडीओ आदित्य रंजन ने कहा कि पकड़े गये सभी चिकित्सक अल्ट्रनेटिव एमबीबीएस सर्टिफिकेट पर मरीजों का इलाज कर रहे थे. इलाज के एवज में 300 रुपये फीस लेते थे. एमबीबीएस एएम का कोई सर्टिफिकेट नहीं होता है. यह सर्टिफिकेट कोर्स धनबाद, पटना व कोलकाता में कराया जाता है. यह आयुष की श्रेणी में नहीं आता है. एसडीओ ने जानकारी देते हुए कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में 30 चिकित्सकों को चिह्नित किया गया है.
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