VIDEO : हजारीबाग में मेगालिथ पत्थरों के बीच से सूर्योदय का नजारा देखने पहुंचे सैकड़ों लोग, क्यों हुए निराश

By Prabhat Khabar Digital Desk
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संजय सागर

बड़कागांव (हजारीबाग) : झारखंड के हजारीबाग जिले का मेगालिथ अब विश्व में जाना जाता है. दो मेगालिथ पत्थरों के बीच से सूर्योदय के अद्भुत नजारे को निहारने के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां 23 सितंबर और 21 मार्च की सुबह जुटते हैं. शनिवार को भी भारी संख्या में लोग जुटे. सुबह जैसे ही घड़ी की सुई 5:49 पर पहुंची, पूरब में सूरज लालिमा लिये बादलों को चीर कर निकला और वहां मौजूद लोग आह्लादित हो उठे. इक्विनॉक्स प्वाइंट पर स्थित दो मेगालिथ पत्थरों के बीच बने V आकार से सूरज का अद्भुत नजारा दिखाई दे रहा था. लोग इस अलौकिक सौंदर्य को निहारने के लिए बेताब थे, लेकिन, झारखंड पर्यटन विभाग की एक टीम की वजह से वहां अव्यवस्था का माहौल बन गया और लोग सुकून से इस दृश्य को नहीं देख पाये.

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इस नजारे को देख-देख लोग रोमांचित हो रहे थे. V प्वाइंट से नजारे को निहारने के लिए थोड़ी ही देर में धक्का-मुक्की शुरू हो गयी. सभी की नजरें सूर्य पर टिकी थीं. इसी दौरान काले बादल छाने लगे और थोड़ी देर के लिए सूरज उसकी ओट में छिप गया. लेकिन, थोड़ी ही देर बाद सूर्यदेव फिर से प्रकट हुए और लोगों के चेहरे पर खुशी लौट आयी. इक्विनॉक्स के कारण होनेवाली ऐसी खगोलीय घटना बेल्जियम,इंग्लैणंड मध्य अमेरिका मे भी देखा जाता है . भारत में झारखंड के बरकागांव के पंकरी बरवाडीह में देखने को मिलता है.

पहली बार prabhatkhabar.com ने आपके लिए इस नजारे को कैमरे में कैद किया. जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर बड़कागांव प्रखंड स्थित पंकरी बरवाडीह में हर साल दो दिन होनेवाली इस अद्भुत खगोलीय घटना के बारे में पहली बार हजारीबाग के शुभाशीष दास ने दुनिया को बताया.

इसके बाद अंतर्राष्ट्रीय खगोलविद यहां आये और इसके बारे में सूक्ष्म अध्ययन किया. इस खगोलीय घटना ने हजारीबाग और बड़कागांव को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दी. बताते हैं कि जर्मनी के पुरातत्वविदों द्वारा इस स्थल का दौरा करने के बाद सरकार ने इसे पर्यटन स्थल का दर्जा देने की पहल शुरू की.

धीरे-धीरे पड़ोसी राज्यों से लोग इस नजारे को देखने बड़कागांव आने लगे. शनिवार को भी बिहार, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों के लोग यहां सुबह 4.30 बजे से ही जुटने लगे थे. झारखंड राज्य पर्यटन विभाग ने इस नजारे को कैमरे में कैद करने के लिए विशेष टीम भेजी थी.

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रांची विश्वविद्यालय और विनोवा भावे विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के प्रोफेसर्स के साथ-साथ इतिहास के जानकार भी यहां पहुंचे थे. अनौपचारिक रूप से यहां एक वर्कशॉप का भी आयोजन किया गया. इसमें लोगों को मेगालिथ के बारे में जानकारी दी गयी. बताया गया कि पुराने जमाने में जनजातीय समुदाय के लोग अपने पूर्वजों के सम्मान में उनकी मौत के बाद पत्थल गाड़ते थे. मुंडा समाज में संभवतः यह परंपरा अाज भी कायम है.

विनोबा भावे विश्वविद्यालय के पुरातत्वविदों ने कहा कि सरकार को इस स्थल की खुदाई करवानी चाहिए. इससे कई नयी जानकारियां सामने आ सकती हैं. सुबह-सुबह मेगालिथ पत्थरों के बीच से होनेवाले सूर्योदय के नजारे को निहारने के लिए एकत्र हुए लोगों को उम्मीद थी कि शुभाशीष दास आयेंगे, तो मेगालिथ के बारे में कई जानकारी देंगे. लेकिन, बाद में मालूम हुआ कि वह छत्तीसगढ़ में हैं और अाज यहां नहीं आयेंगे. इसके बाद कुछ लोगों में निराशा का भाव देखा गया.

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इससे पहले, पर्यटन विभाग की टीम की वजह से यहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया. टीम ने वहां मौजूद लोगों के साथ-साथ प्रिंट मीडिया के पत्रकारों के साथ बदसलूकी भी की.

माया व एजटेक से मिलती-जुलती व्यवस्था : पंकरी बरवाडीह के इक्विनॉक्स मध्य अमेरिका की माया सभ्यता व एजटेक सभ्यता की तरह है. माया व एजटेक सभ्यता में लोग समय की जानकारी सूर्य से ही लेते थे. इन दोनों सभ्यता की सौरपंचांग आज भी मध्य अमेरिका में मौजूद हैं. पंकरी बरवाडीह का इक्विनॉक्स स्थल संभवत:35000 ईसा पूर्व का है. पुरातत्व विज्ञान के विशेषज्ञ शिव शंकर दास ने बताया कि कर्णपुरा क्षेत्र इसको गुफा, दुमारों का गुफा, केरेडारी का नावतंगवा गुफा, टंडवा का हरगौरी गुफा में प्राचीन मानव निवास करते थे .इसलिए पंकरी बरवाडीह में सौरपंचांग को लेकर वेधशाला बनाये गये होंगे. श्री दास ने कहा कि पुरातत्व विभाग द्वरा इस स्थल पर ध्यान दिया जाना चाहिए. इस संबंध में मेगालिथ सभ्यता के विशेषज्ञ सुभाषित दास ने बताया कि पंकरी बरवाडीह में मेघालय सभ्यता के कारण क्या घटनाएं होती हैं, इस संबंध में मैं काफी दिनों से शोध कर रहा हूं. इस स्थल को संरक्षित करने की जरूरत है.

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पर्यटन अधिकारियों ने किया अवलोकन : इक्विनॉक्स प्वाइंट का अध्ययन करने के लिए झारखंड सरकार के पर्यटन विभाग एवं कला व संस्कृति विभाग से अधिकारी व विशेषज्ञ भी यहां पहुंचे थे. अमिताभ कुमार, नलिन पांडे ,सचिन कुमार ने इस प्वाइंट का अध्ययन किया. अधिकारियों ने संयुक्त रूप से कहा कि यह काफी महत्वपूर्ण स्थल है. यह खगोल विज्ञान के लिए वेधशाला का काम कर सकता है. इस स्थल को निश्चित रूप से संरक्षित किया जायेगा.

इक्विनॉक्स पॉइंट को संरक्षण देने की मांग : इस अद्भुत खगोलीय घटना को देखने के लिए बिनोवा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर रमेश शरण भी पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि मेगालिथ सभ्यता पूरे भारत में है. झारखंड के अन्य स्थानों पर भी हैं. बड़कागांव में भी इस तरह का महत्वपूर्ण स्थल है. इसे संरक्षित करने की जरूरत है. रजिस्ट्रार डॉक्टर वंशीधर रुख़्यार, डॉक्टर विनोद रंजन, डॉक्टर चंदन सिंह ,डॉक्टर ए अनुपम, डॉक्टर अभय कुमार, डॉक्टर गंगानंद झा, रांची विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष एके चट्टोर, गीता ओझा, डॉक्टर आरती मेहता, अलख देव प्रसाद, कर्णपुरा कॉलेज के इतिहास विभाग के व्याख्याता प्रोफेसर सुरेश महतो, बड़कागांव पूर्वी पंचायत के मुखिया कैलाश कुमार राणा ,मॉडर्न हाई स्कूल के प्राचार्य मोहम्मद इब्राहिम ,पश्चिम बंगाल से आये शिवनारायण सिंह, राम नारायण सिंह ने बताया कि प्वाइंट भारत के लिए महत्वपूर्ण स्थल है. इसके चारों ओर एनटीपीसी एवं जय मां अंबे के द्वारा कोयला खनन का काम हो रहा है. इससे इस स्थल का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है. इसे विकसित करके संरक्षित किये जाने की जरूरत है.

इस अवसर पर प्रखंड विकास पदाधिकारी अलका कुमारी, एसडीपीओ केके महतो, थाना प्रभारी अकील अहमद, शिव शंकर महतो, उमेश विश्वकर्मा समेत विभिन्न स्कूल, कॉलेजों के विद्यार्थी और शिक्षक मौजूद थे.

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