मां! जन्म देकर मरने के लिए ही छोड़ देना था, तो जन्म ही क्यों दिया?

Published at :10 Aug 2017 2:39 PM (IST)
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मां! जन्म देकर मरने के लिए ही छोड़ देना था, तो जन्म ही क्यों दिया?

चौपारण : दुनिया में करोड़ों महिलाएं हैं, जो मातृत्व सुख के लिए तरस रही हैं. वहीं ऐसी भी महिलाएं हैं, जो अपनी कोख में 8-9 महीने तक बच्चे को पालने के बाद उसे कभी झाड़ियों में, तो कभी कूड़े की ढेर या फिर किसी गड्ढे में फेंक देती हैं. हजारीबाग के चौपारण मेंएकनवजात झाड़ी में […]

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चौपारण : दुनिया में करोड़ों महिलाएं हैं, जो मातृत्व सुख के लिए तरस रही हैं. वहीं ऐसी भी महिलाएं हैं, जो अपनी कोख में 8-9 महीने तक बच्चे को पालने के बाद उसे कभी झाड़ियों में, तो कभी कूड़े की ढेर या फिर किसी गड्ढे में फेंक देती हैं. हजारीबाग के चौपारण मेंएकनवजात झाड़ी में मिली है. उसका शरीर गड्ढे में था. शरीर बालू से ढके थे. शरीर पर चींटियां रेंग रही थी.

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बच्ची की इस हालत को देख कर रवीना का दिल पसीज गया और उसने उसेगोद ले लिया. लेकिन,उसे जन्म देनेवाली मां का क्या, जिसने उसे मरने के लिएझाड़ियों में कीड़े-मकोड़ों के बीच छोड़ दिया. आज यदि यह बच्ची बोल पाती, तो शायद यही पूछती, ‘मां! मुझे मार ही डालना था, तो जन्म क्यों दिया? अपनी कोख में मेरे आकार लेने से पहले ही मुझे क्यों नहीं मार दिया!’

मामला हजारीबाग जिले के चौपारण प्रखंड के चतरा रोड स्थित रानीक मोड़ के पासकी है. किसी महिला ने बच्ची को जन्म देने के बाद उसे झाड़ीमें फेंक दिया. लावारिस पड़ी इस बच्ची का रुदन सुन कर लोग वहां पहुंचे और उसे वहां से निकाल लिया. इतना ही नहीं,थोड़ीहीदेरमेंउसेपालनेवालीमांभीमिलगयी.

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झाड़ी में लावारिस मिली इस मासूम को रानीक गांव के रवीना खातून ने गोद लेकरममता की छांव दी. बताया जाता है कि गुरुवार सुबह गांव की कुछ महिलाएं शौच के लिए जा रही थीं. इसी दौरान किसी ने झाड़ी से नवजात शिशुके रोने की आवाज सुनी. सभी महिलाएं उस तरफ गयीं, जहांसे बच्ची के रोने की आवाज आ रही थी. महिलाओं ने देखा कि एक बच्ची रो रही है.

बच्ची का शरीर बालू एवं मिट्टी से ढका था. बच्ची का मुंह खुला. बच्ची के शरीरपर चींटियां रेंग रही थीं. महिलाओं में से एक सलमा खातून उस मासूम को अपने घर ले आयी. बाद में उसके पड़ोस में रहनेवाली मोहम्मद खातून की पत्नी रवीना खातून ने बच्ची को गोद ले लिया.

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सूचनामिलते ही सीडीपीओ सविता कुमारी, सेविका नीलिमा देवी, समाज सेवी रणजीत सिंह, गिरधारी यादव, मुखिया बिनोद सिंह वहां पहुंचे. सभी ने मिल कर बच्ची को सामुदायिक अस्पताल में भरती कराया. रवीना ने कहा है किअब यह मासूम उसकी बेटी है और उसके लालन-पालन की जिम्मेवारी उसकी है.

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