बच्चे स्कूल में, महिलाएं काम पर

Published at :07 Jul 2017 10:23 AM (IST)
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बच्चे स्कूल में, महिलाएं काम पर

कटकमसांडी : हजारीबाग के कटकमसांडी के अंतर्गत पड़नेवाले बिरहोर टंडा गांव के बिरहोर परिवारों की जिंदगी बदलने लगी है. गांव के कई परिवारों ने अपने मेहनत के बल पर जीवनशैली बदल ली है. इतना ही नहीं, बच्चों को स्कूल भी भेज रहे हैं. कंडसार बिरहोर टंडा के 15 बिरहोर ट्रैक्टर चलाकर जीविकोपार्जन कर रहे हैं […]

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कटकमसांडी : हजारीबाग के कटकमसांडी के अंतर्गत पड़नेवाले बिरहोर टंडा गांव के बिरहोर परिवारों की जिंदगी बदलने लगी है. गांव के कई परिवारों ने अपने मेहनत के बल पर जीवनशैली बदल ली है.
इतना ही नहीं, बच्चों को स्कूल भी भेज रहे हैं. कंडसार बिरहोर टंडा के 15 बिरहोर ट्रैक्टर चलाकर जीविकोपार्जन कर रहे हैं और बच्चों को पढ़ा लिखा रहे हैं. बिरहोर परिवारों के जीवन की तसवीर किस तरह बदल रही है, यह गांव एक उदाहरण है. कभी जंगली शिकार करने और जड़ी-बूटी बेचने के नाम पर बिरहोर महिलाओं की पहचान थी, लेकिन बिरहोर महिलाओं को अब खेतों में काम करते देखा जा सकता है. महिला मजदूरी कर भी अपने बच्चों का लालन-पालन कर रही हैं.
…ताकि समाज में बच्चों की बने पहचान : बिरहोर टंडा में रहनेवाले लोगों ने जिंदगी को अलग तरीके से जीने की बीड़ा उठायी है. टंडा के बिरहोरों का मानना है कि आदिम जिंदगी की तरह कब तक जीते रहेंगे. समय के अनुसार बदलाव की जरूरत है. पूर्वज जंगली कंदमूल खाकर गुजारा करते थे, लेकिन उनका सपना तो बच्चों को पढ़ाना है, ताकि समाज में उनकी पहचान बन सके. अब बिरहोर टंडा का कोई लोग जंगल नहीं जाता है. घरों में रहकर महिला-पुरुण रस्सी, चट्टाई, बांस की टोकरी, सूप, दाउरा आदि का निर्माण करते हैं और बाजार में बेचते हैं. टंडा के बिरहोरों को सरकार से सहयोग की जरूरत हैं, ताकि अपनी आमदनी को और बढ़ा सके.
महिलाएं कर रही हैं खेती व मजदूरी
इस गांव के गोपाल बिरहोर, सावन बिरहोर, विजय बिरहोर, राजकुमार बिरहोर, नारायण बिरहोर, अघनू बिरहोर, चरकू बिरहोर, आतो बिरहोर, सोमा बिरहोर, लाला बिरहोर, मनोज बिरहोर, प्रकाश बिरहोर, चरकू बिरहोर, संजय बिरहोर व पूजा बिरहोर ट्रैक्टर चलाने का काम करते हैं.
गोपाल ने बताया कि वह प्रत्येक दिन 250 से 300 रुपये तक कमा लेता है. वह अपने नौ बच्चों समेत पत्नी का लालन-पालन कर रहा है. गोपाल का सपना है कि उसके बच्चे पढ़ लिख कर सरकारी नौकरी करे. सावन व विजय बिरहोर भी ट्रैक्टर चलाता है. बच्चों को वह स्कूल भेजता है. सोमा बिरहोर ने बताया कि सरकार से बच्चों को समय पर छात्रवृत्ति मिले. वहीं परिवार तक कल्याणकारी योजना पहुंचे.
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