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तेलंगाना टनल में फंसे संतोष साहू के गांव से ग्राउंड रिपोर्ट : पत्नी बोली- उनके सिवा कमाने वाला कोई नहीं

Updated at : 02 Mar 2025 11:05 PM (IST)
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तेलंगाना टनल में फंसे संतोष साहू के गांव से ग्राउंड रिपोर्ट : पत्नी बोली- उनके सिवा कमाने वाला कोई नहीं
गुमला जिले के तुर्रा गांव में पसरा सन्नाटा. फोटो : प्रभात खबर

Telangana Tunnel Collapse Update: तेलंगाना टनल में गुमला जिले के 4 श्रमिक फंसे हैं. इनमें एक संतोष साहू के गांव प्रभात खबर की टीम पहुंची. गांव में अभी कैसा है माहौल, यहां पढ़ें.

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Telangana Tunnel Collapse Update| गुमला, दुर्जय पासवान : तेलंगाना के नागरकुरनूल के सुरंग में गुमला शहर से सटे तिर्रा गांव का संतोष साहू भी फंसा है. संतोष की पत्नी और तीन बच्चे यहां हैं. जब से संतोष सुरंग में फंसा है, तब से उसकी पत्नी संतोषी देवी गुमशुम रहने लगी है. उसने खाना-पीना बंद कर दिया है. हालांकि, अपने दर्द को छिपाकर हर दिन बच्चों को स्कूल भेज रही है. इसके बाद दिन भर दरवाजे के पास दिन भर इस इंतजार में बैठी रहती है कि उसका पति तेलंगाना से आ जायेगा. फोन कभी नहीं छोड़ती, क्योंकि उसे उम्मीद है कि उसका पति लौटेगा. संतोष को तेलंगाना से लाने के लिए उसका भाई श्रवण साहू नागरकुरनूल गया हुआ है.

गेट के बाहर गुमशुम बैठी संतोषी देवी (शॉल ओढ़े हुए) और उसका हालचाल लेने के लिए आयी गांव की महिलाएं. फोटो : प्रभात खबर

संतोष के गांव तुर्रा में पसरा है मातम

संतोष की पत्नी संतोषी हर घंटे अपने भाई को फोन करती है. उससे पूछती है कि संतोष सुरंग से निकला या नहीं. शनिवार को प्रभात खबर तिर्रा गांव पहुंचा, तो पाया कि संतोष समेत गुमला जिले के 4 लोगों के सुरंग में फंसने की सूचना मिलने के बाद से पूरे गांव में मातम पसरा है. हर कोई संतोष के आने का इंतजार कर रहा है. यहां तक कि सुबह-शाम गांव वाले संतोषी देवी के घर पहुंचकर उसका हालचाल ले रहे हैं.

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संतोष की पत्नी संतोषी साहू की आंखों में आ गये आंसू

प्रभात खबर से बातचीत के क्रम में संतोषी साहू अपने दर्द को नहीं छिपा सकी. संतोषी ने कहा कि उसके पति के सिवा घर में कमाने वाला कोई नहीं है. उसके 3 बच्चे हैं. सभी छोटे हैं. अगर उसके पति को कुछ हो गया, तो परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा. पति को याद कर उसकी आंखों में आंसू आ गये.

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संतोष के भाई ने कहा- एक सप्ताह से सब दुखी हैं

संतोष साहू के बड़े भाई अशोक साहू ने बताया कि एक सप्ताह से परिवार के सभी लोग दुखी हैं. गांव के लोग दुखी हैं. क्या होगा, क्या नहीं, यही सोचते रहते हैं. संतोष को सुरंग से कब तक निकाला जायेगा, कोई नहीं जानता. जो लोग तेलंगाना गये हैं, उनसे हर दिन कई बार फोन पर जानकारी लेते हैं. उनको भी कुछ नहीं मालूम कि कब तक सुरंग में फंसे लोगों तक राहत टीम पहुंच पायेगी. गुमला प्रशासन से मदद की उम्मीद है. संतोष के बच्चों को पढ़ाने-लिखाने में मदद करें. चाचा सत्यनारायण साहू ने कहा कि संतोष सकुशल आ जाये, यही ईश्वर से प्रार्थना है. उन्होंने कहा कि बचाव दल उस जगह पहुंचने के करीब है, जहां मलबा ढहा था. जल्द ही कुछ नयी जानकारी सामने आयेगी, ऐसी उम्मीद है.

तेलंगाना के टनल में फंसा गुमला का संतोष साहू और उसका इंतजार करती पत्नी संतोषी. फोटो : प्रभात खबर

रोजगार बंद हुआ, तो पलायन कर गया

करौंदी तिर्रा गांव में रोजगार का साधन ईंट-भट्ठा, पत्थर तुड़ाई और ट्रैक्टर से बालू बेचना था. इस क्षेत्र को वन्य प्राणी क्षेत्र में शामिल किये जाने के कारण सभी ईंट-भट्ठे बंद हो गये. पत्थरों का खनन बंद है. ट्रैक्टर से बालू बेचने पर प्रशासन कार्रवाई करता है. क्षेत्र में सरकार की तरफ से कोई सरकारी योजना नहीं चल रही. इसलिए क्षेत्र के अधिकांश युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर गये हैं. संतोष साहू गांव में ट्रैक्टर चलाता था. स्थानीय स्तर पर रोजगार खत्म हुआ, तो 3 साल पहले वह तेलंगाना चला गया.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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