ढुकू का कलंक मिटा, 101 जोड़ियों को मिली सामाजिक मान्यता

Updated at : 02 Mar 2025 9:42 PM (IST)
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ढुकू का कलंक मिटा, 101 जोड़ियों को मिली सामाजिक मान्यता

गुमला के तेलगांव में सामूहिक विवाह कार्यक्रम हुआ

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गुमला. पहाड़ व जंगलों से सटे आदिवासी बहुल गांवों की एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सभ्यता, परंपरा व जीवनशैली है. भले पूरी दुनिया को ये आकर्षित करती है. लेकिन सच्चाई यह भी है कि यहां रहने वाले एक-दो या सैकड़ों नहीं, बल्कि हजारों युवक-युवती और उनके परिजन शादी का खर्च तक नहीं उठा पाते हैं. ऐसे में वे अपनी इच्छा के अनुरूप किसी को चुन कर पारंपरिक रीति-रिवाज से शादी के बिना रहने लगते हैं. इस परंपरा को ढुकू विवाह (लिव इन रिलेशनशिप) कहा जाता है. ढुकू विवाह करने वाले दंपती को किसी तरह की सामाजिक मान्यता नहीं मिलती है, पर गुमला शहर से सटे तेलगांव में नवयुवक संघ तेलगांव की ओर से आयोजित चतुर्थ सामूहिक विवाह कार्यक्रम में ढुकू विवाह के तहत साथ रहने वाले 101 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ और ढुकू का कलंक मिटा, तो उनके चेहरे खुशी से खिल उठे. यहां गोद में बच्चा साथ लेकर पहुंचे महिला-पुरुष किसी और की शादी समारोह में शामिल होने नहीं, बल्कि खुद की शादी में भाग लेने आये थे. विवाह कार्यक्रम में जोड़ों की शादी हिंदू व सरना धर्मविधि से संपन्न करायी गयी. ढोल-मांदर की थाप पर थिरकते युवक-युवतियों का समूह और विवाह के सहभागी बनने उमड़े जनसैलाब का हुजूम के बीच चौथे साल भी सामूहिक विवाह का यह कार्यक्रम संपन्न हुआ. इसको सफल बनाने में मुख्य रूप से युवा संघ के संरक्षक जगरनाथ उरांव, राजकुमार साहू, फसिया पंचायत के मुखिया नरेश उरांव, अध्यक्ष कृष्णा उरांव, उपाध्यक्ष प्रदीप चौधरी, सचिव विनोद उरांव, रवि उरांव, प्रभात उरांव, अमित उरांव, आशीष उरांव, देवी राम उरांव आदि लोग थे.

शादी को सामाजिक मान्यता दिलाने का प्रयास : जगरनाथसंघ के संरक्षक सह सेवानिवृत्त इंस्पेक्टर जगरनाथ उरांव ने कहा कि इस क्षेत्र में आपसी रजामंदी के बाद लड़की विवाह के बिना ही लड़के के घर में रहने लगती है. ऐसे जोड़ों को सूचीबद्ध कर दाम्पत्य सूत्र में बांधने और उनकी शादी को सामाजिक मान्यता दिलाने के लिए यह प्रयास पांच साल से कर रही है. उन्होंने बताया कि सेन्हा में जब वर्ष 2020 में थानेदार के रूप में कार्यरत था. वहां पर 67 जोड़ी सामूहिक शादी हुआ था. जिसे देखकर वर्ष 2021 से तेलगांव में प्रारंभ किया गया. इस सामूहिक विवाह कार्यक्रम में कई लोगों की अहम योगदान रहता है. तब जाकर यह सामूहिक विवाह सफलता पूर्वक संपन्न होता है. शादी के उपरांत प्रीतिभोज भी होता है. उसे भी बरकरार रखकर प्रीतिभोज का व्यवस्था भी रहता है. जिसमें आदिवासी रीति-रिवाज से लोग पत्तल में भोजन ग्रहण करते हैं.

समाज को खोखला कर रही हैं कुरीतियां : राजकुमार

करौंदी निवासी समाजसेवी राजकुमार साहू ने कहा कि समाज में अंधविश्वास, डायन प्रथा, ढुकू प्रथा, दहेज जैसे कई कुरीतियां व्याप्त हैं, जो समाज को खोखला कर रही है. इन सामाजिक बुराइयों को जड़ से समाप्त करने के लिए समाज को एकजुट होकर कदम बढ़ाना होगा. इससे हर लोगों को सामाजिक नाम दिया जा सके.

सदान की 25 जोड़ियां व आदिवासी के 76 जोड़ियों की हुई शादी

सामूहिक विवाह में 101 जोड़ियों की शादी हुईं. सदान की 25 जोड़ियां थी. उनका विवाह आचार्य शेखर मिश्रा द्वारा पूरे विधि-विधान से संपन्न कराया गया. वहीं 76 जोड़ियां शादी आदिवासी रीति-रिवाज से पहान अर्जुन मुंडा, बुधमनिया उरांव, बसंती उरांव, गंदूर बैगा, सुषमा उरांव द्वारा कराया गया. कन्यादान जगरनाथ उरांव व स्वाति उरांव ने किया.

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