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शहीद चामू उरांव की लगेगी प्रतिमा

Updated at : 01 Dec 2025 10:40 PM (IST)
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शहीद चामू उरांव की लगेगी प्रतिमा

1971 के भारत-पाक युद्ध में शहीद हो गये थे पुग्गू घांसीटोली निवासी चामू उरांव

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गुमला. सन 1971 के भारत-पाक युद्ध में गुमला जिले के कई वीर सैनिकों ने भाग लिया. उनमें से कई वीर सैनिक आज भी जिंदा हैं और अपने परिवार के संग जीवन गुजार रहे हैं. लेकिन कई वीर सैनिक ऐसे भी थे, जो उस युद्ध में शहीद हो गये थे. ऐसे ही वीर शहीदों में एक वीर शहीद गुमला शहर से सटी पुग्गू पंचायत अंतर्गत सिसई रोड स्थित पुग्गू घांसीटोली के अमर शहीद चामू उरांव हैं. हालांकि अमर शहीद चामू उरांव को कोई वीरता मेडल नहीं मिला. लेकिन वे आज भी अपने गांव और जिले के भूतपूर्व सैनिकों के लिए प्रेरणास्रोत हैं. सन 1971 में भारत-पाक की लड़ाई 13 दिनों तक चली थी. यह युद्ध तीन दिसंबर को शुरू होकर 16 दिसंबर को समाप्त हुआ था. इस युद्ध के दौरान भारतीय सेना के सैनिक पुग्गू घांसीटोली के चामू उरांव शहीद हो गये थे. छह दिसंबर 1971 को वे अपने अन्य 10-11 भारतीय सैनिक साथियों के साथ गुसवापाड़ा चौकी (इंडिया-पाकिस्तान बॉर्डर) में मोर्चा संभाले हुए थे. वे अपने साथियों के साथ बंकर में थे. इस बीच पाक सैनिकों ने धोखा से अचानक से उनके बंकर में बम फेंक दिया. बम फटने से वे शहीद हो गये थे. उनके साथ उनके अन्य कई साथी भी शहीद हो गये थे. इधर, पुग्गू घांसीटोली चौराहा का नाम अमर शहीद चामू उरांव चौराहा है. चौराहा में अमर शहीद चामू उरांव की प्रतिमा स्थापित की जायेगी. इसके लिए रांची में चामू उरांव की प्रतिमा बनायी जा रही है. प्रतिमा निर्माण का कार्य अंतिम चरम पर है. प्रतिमा में वे युद्ध मुद्रा में अपनी बंदूक ताने हुए दिखायी देंगे. भूतपूर्व सैनिकों व गांव के लोगों द्वारा घांसीटोली चौराहा में छह दिसंबर से पूर्व उनकी प्रतिमा स्थापित करने व छह दिसंबर को प्रतिमा का अनावरण करने का कार्यक्रम बनाया है. प्रतिमा पूर्ण हो जाने पर उदघाटन कार्यक्रम होगा.

शहीद चामू उरांव का श्रद्धांजलि कार्यक्रम छह को

भूतपूर्व सैनिक बिनोद मिंज ने बताया कि छह दिसंबर को पुग्गू घांसीटोली में अमर शहीद चामू उरांव का श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. भूतपूर्व सैनिकों व गांव वालों के सहयोग से हर साल घांसीटोली में कार्यक्रम आयोजित करते हैं. इस साल उनकी प्रतिमा स्थापित कर अनावरण करने की योजना है. यदि प्रतिमा पूर्ण हो जाती है, तो अनावरण होगा, नहीं तो बाद में तिथि तय कर कार्यक्रम किया जायेगा. उन्होंने बताया कि अमर शहीद चामू उरांव गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं. हम खुद के स्तर पर चंदा एकत्रित कर कार्यक्रम करते हैं. प्रशासन को ऐसे अमर शहीदों पर ध्यान देने की जरूरत है.

प्रभात खबर ने शहीद की प्रतिमा का उठाया था मुद्दा

भारत-पाक युद्ध में शहीद हुए चामू उरांव लंबे समय तक गुमनाम रहे. 1971 युद्ध में शहीद हुए शहीदों की खोज में प्रभात खबर ने शहीद के गांव को खोजा था. साथ ही मुद्दा भी उठाया था कि गुमला में शहीद की प्रतिमा नहीं है. शहीद के परिजनों ने प्रतिमा स्थापित करने की मांग की थी. इसके बाद कई सीरीज में खबर छपी थी. अब शहीद की प्रतिमा स्थापित होने से शहीद को मान-सम्मान मिलेगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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