आंबेडकर नगर बूथ पर हंगामा, मारपीट से कुछ देर दहशत में रहे मतदाता

मतदान शुरू होने के साथ ही एक उम्मीदवार के एजेंट और समर्थक आपस में उलझ पड़े
गुमला. गुमला. शहर के आंबेडकर नगर स्थित सामुदायिक भवन में वार्ड नंबर चार के बूथ पर सुबह सात बजे मतदान शुरू होते ही विवाद खड़ा हो गया. मतदान शुरू होने के साथ ही एक उम्मीदवार के एजेंट और समर्थक आपस में उलझ पड़े. मामला इतना बढ़ गया कि टेंपो से मतदाताओं को बूथ तक ला रहे एक चालक के साथ मारपीट कर दी गयी, जिससे उसके कपड़े तक फट गये. मारपीट की सूचना मिलते पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया. भीड़ को हटा कर मामला शांत कराया गया, लेकिन अचानक हुई इस घटना से मतदाता सहम गये. कुछ मतदाता तो डर के कारण बूथ तक नहीं पहुंचे. स्थिति सामान्य होने के बाद ही लोगों ने दोबारा मतदान शुरू किया. बूथ पर विवाद यहीं नहीं थमा. एक पुलिस जवान कुछ मतदाताओं से ऊंची आवाज में बहस करते नजर आये, जिससे मतदाताओं में भय का माहौल बना रहा. हालांकि मौजूद पुलिस अधिकारियों और मजिस्ट्रेट ने हस्तक्षेप कर मामला शांत कराया. सुबह आठ बजे से दोपहर तीन बजे तक समर्थकों के बीच रुक-रुक कर नोकझोंक होती रही. विवाद की सूचना पर एसपी हरिश बिन जमां ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने के निर्देश दिये. सुरक्षा बढ़ने के बाद स्थिति नियंत्रण में आयी, लेकिन कुछ समर्थक बाइक से बूथ के सामने चक्कर लगाकर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश करते दिखे. वार्ड नंबर चार से पांच उम्मीदवार मैदान में हैं. इनमें चाचा-भतीजी और चाचा-भतीजा आमने-सामने हैं. एक ही मोहल्ले आंबेडकर नगर से चार उम्मीदवार होने के कारण मतदान के दौरान तनाव का माहौल बना रहा. हालांकि उम्मीदवार शांत दिखे, लेकिन कुछ युवा एजेंट और समर्थक कथित तौर पर नशे की हालत में बूथ के आसपास घूमते रहे और मतदाताओं को वाहनों से लाकर मतदान केंद्र तक पहुंचाते रहे. किसी बड़ी घटना को रोकने के लिए थानेदार महेंद्र करमाली के निर्देश पर हर आधे घंटे में पुलिस की गश्ती टीम सायरन बजाते हुए बूथ पहुंचती रही. एसडीओ राजीव नीरज व एसडीपीओ सुरेश प्रसाद यादव भी वार्ड चार और पांच के बूथों पर नजर बनाये हुए थे. जिंदा को बताया गया मृत, वोट करने से रह गया वंचित : खड़िया पाड़ा निवासी लिबनुस डुंगडुंग मतदान के लिए पहचान पत्र, आधार कार्ड और मतदाता पर्ची लेकर बूथ पहुंचे. घंटों कतार में खड़े रहने के बाद जब वे मतदान कक्ष में पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है. जांच में पता चला कि उनका नाम सूची से हटा दिया गया है. लिबनुस डुंगडुंग का कहना है कि वे जीवित हैं, इसके बावजूद उन्हें मृत घोषित कर मतदाता सूची से नाम हटा दिया गया, जिससे वे मतदान के अधिकार से वंचित रह गये.
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By Prabhat Khabar News Desk
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