खंडहर स्कूल भवन में गुजर रही जिंदगी, गुमला में डेढ़ साल से जीवन दांव पर लगा जी रहा परिवार

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Gumla News

इसी जर्जर स्कूल में रहता है पूरा परिवार

Gumla News: गुमला में एक गरीब परिवार पिछले डेढ़ साल से खंडहर हो चुके स्कूल भवन में रहने को मजबूर है. जर्जर इमारत में हर दिन हादसे का खतरा बना हुआ है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं मिला. परिवार सरकार से पिछले कई माह से आवास की मांग कर रहा है. परिवार में तीन छोटे बच्चे भी हैं. पूरी खबर नीचे पढ़ें…

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Gumla News: गुमला स्थित जारी प्रखंड के सीकरी पंचायत अंतर्गत पगुरा गांव में एक गरीब मजदूर परिवार पिछले 18 महीने से बंद पड़े जर्जर प्राथमिक विद्यालय भवन में रहने को मजबूर है. प्रशासनिक सहायता और आवास योजना का लाभ नहीं मिलने से राजेश सिंह, उनकी पत्नी प्रभा देवी और तीन छोटे बच्चे हर दिन खतरे के बीच जीवन बिता रहे हैं. जानकारी के अनुसार वर्ष 2024 में राजेश सिंह परिवार सहित मजदूरी के लिये दूसरे राज्य गये थे. करीब आठ महीने बाद लौटने पर उनका कच्चा मकान पूरी तरह ध्वस्त हो चुका था.

दैनिक मजदूरी करते हैं राजेश सिंह

आर्थिक तंगी के कारण नया घर बनाना संभव नहीं होने पर परिवार ने गांव के बंद पड़े स्कूल भवन को ही अपना आश्रय बना लिया. जर्जर भवन की दीवारों में दरारें हैं, छत से प्लास्टर गिरता रहता है और बरसात में पानी टपकता है. प्रभा देवी ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत कई बार पंचायत के मुखिया से गुहार लगायी, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला. दूसरी ओर राजेश सिंह दिहाड़ी मजदूरी कर प्रतिदिन 250 से 300 रुपये कमाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं.

बीडीओ की ओर से मिला आश्वासन

ग्रामीण वीरेंद्र दास ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर परिवार को आवास उपलब्ध कराने की मांग की. इस संबंध में बीडीओ रविकांत शर्मा ने कहा कि उनका हाल ही में जारी प्रखंड में पदस्थापन हुआ है और मामला उनके संज्ञान में नहीं था. उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच कर पीड़ित परिवार को जल्द आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी.

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अमलेश नंदन सिन्हा

लेखक के बारे में

By अमलेश नंदन सिन्हा

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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