गुमला. गुमला शहर में आम पब्लिक की कोई नहीं सुनता. यहां जो नियम कानून तोड़े, उसकी सब सुनते हैं. सिस्टम भी आम पब्लिक की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दे रहा है. स्कूली छात्रों की जिंदगी से खेला जा रहा है. हम बात कर रहे हैं. गुमला शहर की यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गयी है. गुमला में नो इंट्री का पालन नहीं हो रहा है. जबकि गुमला के चार प्वाइंट करमडीपा, करौंदी, चंदाली व बाइपास चौराहा के समीप नो इंट्री का बोर्ड लगा है. इसके बाद भी बड़ी मालवाहक गाड़ियां शहर में घुस रही हैं. इसका नतीजा है कि स्कूल आने जाने वाले छात्रों के एक्सीडेंट होने का खतरा बना रहता है. यहां तक की मुख्य सड़कों पर अभी भी बड़ी गाड़ियों को खड़ी कर बड़े व्यापारी सामान का लोडिंग व अनलोडिंग करते हैं, जिससे स्कूल के समय सड़क जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है. मालवाहक गाड़ियों के अलावा बसों की लापरवाही सुधरी नहीं है. मुख्य सड़कों पर बसों को खड़ी कर सामानों को उतारा व चढ़ाया जाता है, जिससे सड़क जाम हो रही हैं. इससे छात्रों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. हद तो टेंपो चालकों ने कर दी है. गुमला में जिधर देंखे, टेंपो खड़े रहते हैं. कई बार तो बीच सड़क पर टेंपो खड़ा कर यात्री चढ़ाते व उतारते हैं. यहां तक कि सामान की लोडिंग व अनलोडिंग करना है, तो टेंपो चालक सड़क पर ही टेंपो को खड़ा कर देते हैं. सबसे अधिक परेशानी सिसई रोड धर्मशाला, बड़ाइक पेट्रोल पंप, पालकोट रोड शारदा कॉम्पलेक्स, जशपुर रोड पटेल चौक, लोहरदगा रोड मोड़ के समीप की सड़कों पर टेंपो चालकों का कब्जा हो गया है. जबकि यहां ट्रैफिक पुलिस ड्यूटी करती हैं. आम पब्लिक तो किसी प्रकार बायें-दायें कर सड़क पार कर लेते हैं. परंतु सबसे अधिक डर स्कूली बच्चों के आवागमन से है. क्योंकि थोड़ी से चूक यहां बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं. इसके बाद भी प्रशासन इस व्यवस्था में सुधार की पहल नहीं कर रहा है. अगर प्रशासन नो इंट्री व यातायात नियम का सख्ती से पालन नहीं किया, तो गुमला शहर में कभी बड़ा हादसा हो सकता है. सबसे चौंकाने वाली बात की 30 जनवरी को गुमला के वरीय अधिकारियों ने बैठक कर शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने का वादा किया था. परंतु प्रशासनिक अधिकारियों का आश्वासन नगर भवन के बंद कमरे तक सिमट कर रह गया. गुमला शहर में आम पब्लिक की कोई नहीं सुनता. यहां जो नियम कानून तोड़े, उसकी सब सुनते हैं. सिस्टम भी आम पब्लिक की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दे रहा है. स्कूली छात्रों की जिंदगी से खेला जा रहा है. हम बात कर रहे हैं. गुमला शहर की यातायात व्यवस्था ध्वस्त हो गयी है. गुमला में नो इंट्री का पालन नहीं हो रहा है. जबकि गुमला के चार प्वाइंट करमडीपा, करौंदी, चंदाली व बाइपास चौराहा के समीप नो इंट्री का बोर्ड लगा है. इसके बाद भी बड़ी मालवाहक गाड़ियां शहर में घुस रही हैं. इसका नतीजा है कि स्कूल आने जाने वाले छात्रों के एक्सीडेंट होने का खतरा बना रहता है. यहां तक की मुख्य सड़कों पर अभी भी बड़ी गाड़ियों को खड़ी कर बड़े व्यापारी सामान का लोडिंग व अनलोडिंग करते हैं, जिससे स्कूल के समय सड़क जाम की समस्या उत्पन्न हो जाती है. मालवाहक गाड़ियों के अलावा बसों की लापरवाही सुधरी नहीं है. मुख्य सड़कों पर बसों को खड़ी कर सामानों को उतारा व चढ़ाया जाता है, जिससे सड़क जाम हो रही हैं. इससे छात्रों को परेशानी झेलनी पड़ रही है. हद तो टेंपो चालकों ने कर दी है. गुमला में जिधर देंखे, टेंपो खड़े रहते हैं. कई बार तो बीच सड़क पर टेंपो खड़ा कर यात्री चढ़ाते व उतारते हैं. यहां तक कि सामान की लोडिंग व अनलोडिंग करना है, तो टेंपो चालक सड़क पर ही टेंपो को खड़ा कर देते हैं. सबसे अधिक परेशानी सिसई रोड धर्मशाला, बड़ाइक पेट्रोल पंप, पालकोट रोड शारदा कॉम्पलेक्स, जशपुर रोड पटेल चौक, लोहरदगा रोड मोड़ के समीप की सड़कों पर टेंपो चालकों का कब्जा हो गया है. जबकि यहां ट्रैफिक पुलिस ड्यूटी करती हैं. आम पब्लिक तो किसी प्रकार बायें-दायें कर सड़क पार कर लेते हैं. परंतु सबसे अधिक डर स्कूली बच्चों के आवागमन से है. क्योंकि थोड़ी से चूक यहां बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं. इसके बाद भी प्रशासन इस व्यवस्था में सुधार की पहल नहीं कर रहा है. अगर प्रशासन नो इंट्री व यातायात नियम का सख्ती से पालन नहीं किया, तो गुमला शहर में कभी बड़ा हादसा हो सकता है. सबसे चौंकाने वाली बात की 30 जनवरी को गुमला के वरीय अधिकारियों ने बैठक कर शहर की यातायात व्यवस्था को सुधारने का वादा किया था. परंतु प्रशासनिक अधिकारियों का आश्वासन नगर भवन के बंद कमरे तक सिमट कर रह गया.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

