प्राकृतिक खेती में आती है कम लागत : राजेश साहू
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प्राकृतिक खेती में आती है कम लागत : राजेश साहू
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गुमला. बिशुनपुर के राजेश साहू को कृषि विज्ञान केंद्र विकास भारती बिशुनपुर द्वारा 2015 में प्राकृतिक खेती करने हेतु प्रशिक्षण के लिए पद्मश्री सुभाष पालेकर द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में लखनऊ उत्तरप्रदेश भेजा गया था. इसके बाद राजेश साहू पालेकर से प्रेरित होकर प्राकृतिक खेती करना शुरू की. वर्ष 2022-23 में कृषि विज्ञान केंद्र में आयी परियोजना प्राकृतिक खेती विस्तार के अंतर्गत प्राकृतिक खेती के अवयओं को लेकर प्रत्यक्षण कराया गया, तब से राजेश साहू लगातार अपनी प्राकृतिक खेती को बढ़ाते हुए आज 2.5 एकड़ में प्राकृतिक खेती कर रहे हैं. इसमें वे मुख्य रूप से सब्जी की खेती, बीज उत्पादन, सब्जी नर्सरी के साथ-साथ कुछ फलों की भी खेती कर रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी साल भर में शुद्ध मुनाफा तीन लाख, 15 हजार रुपये हो रहा है. राजेश का मानना है कि यदि किसान प्राकृतिक खेती अपनाते हैं, तो खेती में लागत कम आती है. साथ ही साथ उपज गुणवत्ता युक्त होता है, जो जल्दी खराब नहीं होता है. साथ ही मिट्टी की उर्वरा भी बढ़ती है. इसलिए किसान भाई प्राकृतिक खेती अपनाये. कहा कि प्राकृतिक खेती द्वारा उत्पादित उपज को लोग खायेंगे, तो वह जहर मुक्त भी होगा.
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