डायन-बिसाही के शक में टांगी से काटकर की थी पांच लोगों की हत्या, मिली उम्रकैद की सजा

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 27 May 2026 7:44 PM

विज्ञापन

प्रतीकात्मक फोटो

Gumla News: गुमला के बहुचर्चित बुरुहातु नरसंहार मामले में अदालत ने सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनायी है. डायन-बिसाही के शक में आरोपियों ने 2021 में एक ही परिवार के पांच लोगों की टांगी से काटकर हत्या कर दी थी, जिसमें एक मासूम बच्चा भी शामिल था. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

विज्ञापन

गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

Gumla News: झारखंड के गुमला जिले में दहला देने वाले बहुचर्चित कामडारा बुरुहातु नरसंहार मामले में जिला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-5 की अदालत ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए सात दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनायी है. डायन-बिसाही के शक में घटी इस इस खौफनाक नरसंहार की घटना ने राज्य ही नहीं, बल्कि देश को झकझोर कर रख दिया था. अंधविश्वास में आकर आरोपियों ने एक ही परिवार के पांच लोगों को घर में घुसकर टांगी से काट डाला था. मृतकों में पांच साल का मासूम बच्चा भी शामिल था.

अदालत से सात लोगों को मिली उम्रकैद

अदालत ने आरोपी अमृत टोपनो, डेनियल टोपनो, सावन टोपनो, फिरंगी टोपनो, सलीम टोपनो, सोमा टोपनो और फिलिप टोपनो को दोषी करार देते हुए आइपीसी की धारा 302/149 सहपठित 120-बी तथा धारा 460/149 सहपठित 120-बी के तहत आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनायी है. इसके अलावा अन्य धाराओं में भी अलग-अलग कारावास और जुर्माने की सजा दी गयी. अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.

फुटबॉल मैदान में पंचायत, फिर रात में नरसंहार

यह सनसनीखेज वारदात 23 फरवरी 2021 की रात कामडारा थाना क्षेत्र के बुरुहातु आमटोली गांव में हुई थी. घटना से पहले उसी दिन गांव के फुटबॉल मैदान में सैकड़ों ग्रामीणों की मौजूदगी में पंचायत बुलायी गयी थी. पंचायत में गांव के कुछ लोगों की बीमारी और मौत के लिए 55 वर्षीय जोसफीना डहंगा और उनके पति निकोदीन टोपनो को जिम्मेदार ठहराते हुए उन पर जादू-टोना करने का आरोप लगाया गया था. बताया जाता है कि पंचायत खत्म होने के बाद रात होते ही गांव में साजिश ने खूनी रूप ले लिया. देर रात अज्ञात हमलावरों ने परिवार के घर पर धावा बोल दिया. इसके बाद जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया था.

आरोपियों ने परिवार में किसी नहीं छोड़ा था

हमलावरों ने जोसफीना डहंगा, उनके पति निकोदीन टोपनो, 32 वर्षीय भीमसेंट टोपनो, उसकी पत्नी सिलवंती टोपनो और पांच वर्षीय मासूम अलबिन टोपनो पर टांगी से हमला कर बेरहमी से हत्या कर दी थी. सभी के सिर, गर्दन और चेहरे पर इतने वार किये गये थे कि शवों की हालत देखकर पुलिसकर्मी तक सिहर उठे थे. सबसे दर्दनाक बात यह थी कि आरोपियों ने परिवार के एक भी सदस्य को जीवित नहीं छोड़ा था. पूरा घर लाशों में तब्दील हो गया था. गांव में चारों ओर चीख-पुकार और खौफ का माहौल था.

पुलिस महकमा भी दहल उठा था

घटना की भयावहता ने पूरे पुलिस महकमे को हिला दिया था. तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर बालमुकुंद सिंह के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और धीरे-धीरे इस सामूहिक हत्या की परतें खुलती चली गयी. जांच में सामने आया कि अंधविश्वास और डायन-बिसाही के आरोप में इस सामूहिक हत्या की साजिश रची गयी थी. यह मामला पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया था. सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार समूहों ने भी इस घटना पर गहरा आक्रोश जताया था.

इसे भी पढ़ें: रहस्यमयी आग से दहशत में परिवार, घर छोड़ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर

फैसले के बाद फिर ताजा हुई दर्दनाक यादें

बुधवार को जब अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गुमला जेल में बंद आरोपियों की पेशी के बाद सजा सुनायी, तो गांव और जिले के लोगों के जेहन में वह खौफनाक रात फिर से ताजा हो गयी. लोगों का कहना है कि अदालत का फैसला भले ही देर से आया, लेकिन इससे यह संदेश जरूर गया है कि अंधविश्वास के नाम पर हत्या करने वालों को कानून कभी माफ नहीं करेगा. हालांकि, इस फैसले का इंतजार करने के लिए उस परिवार का एक भी सदस्य आज जीवित नहीं बचा.

इसे भी पढ़ें: लावालौंग में 18 लाख का अफीम डोडा और पोस्ता बरामद, पुलिस को देखकर फरार हुए तस्कर

विज्ञापन
KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola