कार्तिक उरांव ने आदिवासियों की जमीन लूट को लेकर किया पहला आंदोलन, जानें किनके कहने पर राजनीति में आये

Updated at : 29 Oct 2022 12:09 PM (IST)
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कार्तिक उरांव ने आदिवासियों की जमीन लूट को लेकर किया पहला आंदोलन, जानें किनके कहने पर राजनीति में आये

Kartik Oraon

तीन बार सांसद और एक बार विधायक रहे कार्तिक उरांव की आज जयंती है. कार्तिक उरांव ही पहले व्यक्ति थे जिन्होंने आदिवासियों की जमीन लूट के खिलाफ आंदोलन किया था. गुमला जिला के लिटाटोली गांव में 29 अक्तूबर 1924 को जन्मे कार्तिक उरांव पंडित जवाहर लाल नेहरू के कहने पर राजनीति में कदम रखा था.

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Kartik Oraon Jayanti Special: तीन बार सांसद और एक बार विधायक रहे कार्तिक उरांव की आज जयंती है. कार्तिक उरांव ही पहले व्यक्ति थे जिन्होंने आदिवासियों की जमीन लूट के खिलाफ आंदोलन किया था. गुमला जिला के लिटाटोली गांव में 29 अक्तूबर 1924 को जन्मे कार्तिक उरांव देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के कहने पर राजनीति में कदम रखा था.

कार्तिक उरांव ने ही दिया था ऑटोमैटिक पावर स्टेशन का प्रारूप

कार्तिक उरांव ने साल 1959 में दुनिया के सबसे बड़े ऑटोमैटिक पावर स्टेशन का प्रारूप ब्रिटिश सरकार को दिया था, जो आज हिंकले न्यूक्लीयर पावर प्लांट के नाम से विद्यमान है. 1968 में जब भूदान आंदोलन तेज था. आदिवासियों की जमीन कौड़ी के भाव बिक रहा था. ऐसे समय में कार्तिक उरांव ने इंदिरा गांधी से अपील किया कि आदिवासियों की जमीन लूटने व भूमिहीन होने से बचाएं. कार्तिक उरांव नौ वर्षो तक विदेश में रहे. विदेश प्रवास के बाद साल 1961 के मई माह में एक कुशल व दक्ष अभियंता के रूप में अपने स्वदेश लौटे. वे रांची के एचईसी में सुपरीटेंडेंट कंस्ट्रक्शन डिजाइनर के पद पर काम किये. बाद में उन्हें डिप्टी चीफ इंजीनियर डिजाइनर के पद पर प्रोन्नित मिली.

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नेहरू के कहने पर आये

विदेश से पढ़कर जब कार्तिक उरांव अपने देश लौटे. उस समय दक्षिणी छोटानागपुर के आदिवासियों की हालात को देख कार्तिक उरांव ने समाज के लिए काम करने का दृढ़ संकल्प लिया और जवाहर लाल नेहरू के कहने पर साल 1962 में एचइसी के बड़े पद को छोड़ राजनीति में प्रवेश किये. कार्तिक उरांव ने साल 1962 में कांग्रेस से लोहरदगा संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव में खड़े हुए. चुनाव हार गये पर हिम्मत नहीं हारी. साल 1967 में पुन: वे लोकसभा चुनाव में कूद पड़े और भारी मतों से विजयी हुए. इसके बाद वे 1971 व 1980 के लोकसभा चुनाव में सांसद बने थे. 1977 में भी वे चुनाव लड़े थे. लेकिन हार गये. लोकसभा में हारने के बाद 1977 में उन्होंने बिशुनपुर विधानसभा से चुनाव लड़े और भारी मतों से विजयी हुए थे. आठ दिसंबर 1981 को उनका निधन हुआ था. आज भी कार्तिक उरांव आदिवासियों के मसीहा व छोटानागपुर के काला हीरा के रूप में जाने जाते हैं.

राजनीति में ही हैं बेटी और दामाद

स्व कार्तिक उरांव के निधन के बाद उनके विरासत को आगे बढ़ाते हुए उनकी बेटी गीताश्री उरांव राजनीति में आयी. वे सिसई विधानसभा से विधायक बनी थी और झारखंड में शिक्षा मंत्री भी रही थी. अभी भी गीताश्री उरांव सक्रिय रूप से राजनीति में हैं. जनमुददों को मुखर होकर उठाती रहती हैं. वहीं स्व कार्तिक उरांव के दामाद व गीताश्री उरांव के पति पूर्व आईजी डॉ अरूण उरांव भी राजनीति में सक्रिय हैं. हालांकि वे झारखंड के गांवों में रात्रि पाठशाला का संचालन कर सबसे ज्यादा सुर्खियों में आये हैं. अभी अरूण उरांव भाजपा में हैं.

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कार्तिक उरांव की 98वीं जयंती आज

स्व कार्तिक उरांव की 98वीं कार्तिक जयंती 29 अक्टूबर को मनाया जायेगा. पूरे राज्य में कार्यक्रम होगा. मुख्य कार्यक्रम पैतृक गांव गुमला प्रखंड के लिटाटोली में होगा. लिटाटोली स्थित समाधि स्थल पर सुबह 6.30 बजे से श्रद्धांजली कार्यक्रम शुरू हो जायेगा. लिटाटोली में हजारों लोग जुटेंगे.

रिपोर्ट: दुर्जय पासवान, गुमला

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Rahul Kumar

लेखक के बारे में

By Rahul Kumar

Senior Journalist having more than 11 years of experience in print and digital journalism.

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