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20 गांवों के लोग नहीं देंगे वोट, कहा- चुनाव में बूथ एजेंट बनने वालों के परिवार का कर देंगे दाना-पानी बंद

Updated at : 27 Oct 2024 10:02 AM (IST)
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jharkhand election 2024 meeting in gumla

चुनाव से पहले बैठक करते ग्रामीण.

Jharkhand Chunav: झारखंड के गुमला जिले में लोगों ने चुनाव बहिष्कार का ऐलान कर दिया है. कहा है कि बूथ एजेंट बनने वालों के परिवार का दाना-पानी बंद कर देंगे.

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Jharkhand Chunav|गुमला, दुर्जय पासवान : आजादी के 77 साल बाद भी सड़कें नहीं बनने से घाघरा प्रखंड के बिमरला व दीरगांव पंचायत के 20 गांवों के करीब 15 हजार ग्रामीणों में आक्रोश है. इन गांवों के लोगों ने इस बार विधानसभा चुनाव में वोट नहीं देने का निर्णय लिया है.

ग्रामीणों ने जनसभा कर जारी किया फरमान

शनिवार को दोनों पंचायत के ग्रामीणों ने जनसभा की और फरमान जारी किया है कि अगर विधानसभा चुनाव में गांव का कोई भी व्यक्ति किसी राजनीति पार्टी का बूथ एजेंट बनेगा, तो उसके परिवार का बहिष्कार करते हुए दाना पानी बंद किया जायेगा. पंचायती कर सजा भी दी जायेगी. वहीं, अगर कोई ग्रामीण भी वोट देने जायेगा तो उसे भी सजा दी जायेगी.

हर बार सांसद-विधायक देते हैं आश्वासन, नहीं होता काम

ग्रामीणों ने कहा कि हर चुनाव में बिमरला व दीरगांव पंचायत की सड़कें बनाने की मांग की जाती है. परंतु, हर समय विधायक व सांसद वादा करते हैं. परंतु, सड़कें नहीं बनतीं. लोकसभा चुनाव में भी प्रशासन ने आश्वासन दिया था. पर सड़कें अब तक नहीं बनी. इसलिए इस बार के झारखंड विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने व वोट नहीं डालने का निर्णय सभी 20 गांवों के ग्रामीणों ने लिया है.

ग्रामीण बोले- संकट में जी रहे हैं हम

ग्रामीण बुद्धिमान खड़िया ने कहा है कि हमलोग यहां संकट में जी रहे हैं. सड़कें नहीं होने से गर्भवती व बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में परेशानी होती है. गांव में अस्पताल भवन है. पर न डॉक्टर हैं और न नर्स. इलाज के लिए 30 किमी दूर प्रखंड मुख्यालय घाघरा जाना पड़ता है. स्कूल की छत भी टूटकर गिर रही है. प्रशासन व नेताओं से फरियाद लगा कर लोग थक गये हैं. अब गांव के प्रवेश द्वार पर नेताओं के लिए नो इंट्री की बैरिकेडिंग लगायी जायेगी.

इन गांवों में किया गया विरोध

दीरगांव व बिमरला पंचायत में 15 हजार आबादी है. यह पूरा इलाका घनी आबादीवाला क्षेत्र है. परंतु, सड़कें नहीं होने से गांवों का विकास ठप है. दो पंचायतों में दीरगांव, सलामी, तुसगांव, हेदमी, तेंदार, केदली, सराईडीह, काड़ासिल्ली, बिमरला, जोकारी, गुटवा, बियार, बरटोली, खुखराडीह, सेमला, रूकीघाट, घाघरापाठ, इंजनी, जमगई गांव शामिल है.

बिमरला व दीरगांव पंचायत की जो भी समस्याएं हैं, उन समस्याओं से उपायुक्त को अवगत कराया गया है. अभी चुनाव को लेकर आचार संहिता है. जैसे ही चुनाव खत्म होता है. प्राथमिकता के तौर पर इस क्षेत्र का विकास होगा. सड़कें बनेगी. लोग वोट बहिष्कार न करें.

दिनेश कुमार, बीडीओ घाघरा

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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