गुमला. गुमला में होली पर्व का उत्साह जरूर घरों व जाति धर्म तक सिमट गया है. परंतु अभी भी होलिका दहन की जो पुरानी परंपरा है, वह जीवित है. गुमलाशहर में 200 साल से होलिका दहन हो रहा है. हालांकि आज से 50 साल पहले तक मात्र एक जगह पटेल चौक के समीप होलिका दहन होता था. परंतु अब होलिका दहन दो दर्जन से अधिक स्थानों पर होता है. होलिका दहन की जो परंपरा है, वह अभी भी कायम है. गुमला में हर घर से लोग होलिका दहन में निकलते हैं. बुजुर्ग राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि मैं 1965 ईस्वी में टोटो से गुमला में आकर बसा. चूंकि टोटो में स्कूल नहीं था. परिवार के लोग पढ़ाई करने के लिए गुमला आ गये. तब से मैं गुमला में हूं. गुमला में सबसे पहले पटेल चौक के पास होलिका दहन होता था. उस समय गुमला अधिक विकसित नहीं था. जंगल झाड़ इलाका हुआ करता था. गुमला को जिला का दर्जा भी नहीं मिला था. उस समय लोग मिल-जुल कर होली पर्व मनाते थे. परंतु अब होली पर्व घर व जाति धर्म तक सिमट कर रह गया है. पहले मोहल्ला-मोहल्ला में गीत गायन होता था. खासकर जिन मोहल्लों में बिहारी लोग आकर बसे थे. उन मुहल्लों में होली का गीत व गायन रातभर चलता था. परंतु धीरे-धीरे अब होली गीत व गायन की परंपरा खत्म होती जा रही है. बिरले ही कहीं गीत गायन सुनने को मिलता है. वर्तमान पीढ़ी को इस पर विचार करने की जरूरत है.
शहर में 25 स्थानों पर होता है होलिका दहन
गुमला के पूर्व वार्ड कमिश्नर राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने डीसी को ज्ञापन सौंपा है. इसमें उन्होंने कहा है कि होली पर्व इस वर्ष 15 मार्च को है, जबकि होलिका दहन 13 मार्च को है. गुमला शहरी क्षेत्र के शक्ति संघ पालकोट रोड, पटेल चौक (पुराना सूप कार्यालय के समीप), देवी मंदिर (हाई स्कूल रोड), ज्योति संघ के पास, राम मंदिर के सामने (बड़ाइक मोहल्ला), बड़ाइक मोहल्ला टावर के नजदीक, जवाहर नगर, सरना होली, शांति नगर, बुढ़वा महादेव मंदिर करमटोली, सरहुल नगर कामटोली, शास्त्री नगर चौक बसंत गैरेज के पास, बस पड़ाव दुंदुरिया, चेटर चीक दाड़ी के पास, चेटर अखरा के पास, बैंक कॉलोनी समेत निकटवर्ती टोटो बाजार रोड, करौंदी मेलाटांड़, पुग्गू पंचायत अंतर्गत चंगा नगर, बड़काटोली, खोपाटोली, ढौठाटोली, फसिया पंचायत अंतर्गत फसिया खास, बाजार सीमित ढोढरीटोली व तर्री खास में होलिका दहन का कार्यक्रम होता है. इसमें श्रद्धालुओं की भीड़ होती है. इन जगहों पर सुरक्षा व पुलिस की गश्ती जरूरी है. क्योंकि समय के साथ होलिका दहन के दौरान असामाजिक तत्व घूमते रहते हैं. ऐसे में किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस की सुरक्षा जरूरी है.
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