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स्वस्थ मिट्टी ही सुरक्षित भविष्य की नींव : सुनील

Updated at : 05 Dec 2025 9:57 PM (IST)
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स्वस्थ मिट्टी ही सुरक्षित भविष्य की नींव : सुनील

विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस पर बिशुनपुर में कार्यक्रम का आयोजन

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बिशुनपुर. विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस पर कृषि विज्ञान केंद्र गुमला विकास भारती की तरफ से बिशुनपुर में कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में केंद्र के वैज्ञानिक सुनील कुमार ने कहा कि विश्व मृदा स्वास्थ्य दिवस हमें यह संदेश देता है कि स्वस्थ मिट्टी ही सुरक्षित भविष्य की नींव है. इसलिए मृदा संरक्षण हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है. कहा कि विश्व मृदा दिवस हर साल पांच दिसंबर को मनाया जाता है. यह दिन स्वस्थ मिट्टी के महत्व पर ध्यान केंद्रित करने व मृदा संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन के लिए जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है. यह दिवस थाईलैंड के दिवंगत राजा भूमिबोल अदुल्यादेज की जयंती के सम्मान में मनाया जाता है. राजा भूमिबोल ने इस पहल का बलपूर्वक समर्थन किया था. संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के समर्थन के बाद संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) ने पांच दिसंबर 2013 को विश्व मृदा दिवस घोषित किया. इसके बाद पहली बार अधिकारिक रूप से पांच दिसंबर को यह दिवस मनाया गया. इस दिवस का मुख्य लक्ष्य वैश्विक खाद्य सुरक्षा, पारिस्थितिक तंत्र के संरक्षण व जलवायु परिवर्तन के संबंध में मिट्टी की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करना है. उन्होंने बताया कि मिट्टी हमारे 95 प्रतिशत से अधिक भोजन का स्रोत है. स्वस्थ मिट्टी ही पौधों, जानवरों व मनुष्यों के लिए जीवन को बनाये रखती है. यह दिन मिट्टी के कटाव, प्रदूषण व पोषक तत्वों की कमी जैसे गंभीर पर्यावरणीय मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर प्रदान करता है, ताकि इसके संरक्षण के उपायों को बढ़ावा दिया जा सके. इसके निमित मृदा स्वास्थ्य कार्ड (एसएचसी) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है. पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा 19 फरवरी 2015 को राजस्थान के सूरतगढ़ में लांच किया गया था. इस योजना का उद्देश्य देश के सभी किसानों को उनके खेत की मिट्टी की पोषक तत्वों की स्थिति की जानकारी देना व उन्हें वैज्ञानिक तरीके से खेती करने में मदद करना है. एसएचसी एक टिकाऊ कृषि व किसानों की आय में वृद्धि के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है. इसके तहत मिट्टी के प्राथमिक पोषक तत्व नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, द्वितीय पोषक तत्व सल्फर, सूक्ष्म पोषक तत्व जिंक, आयरन, कॉपर, मैंगनीज, बोरॉन व भौतिक पैरामीटर में अम्लीयता/क्षारीयता की जांच की जाती है. उन्होंने कहा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों व कृषि के लिए कई मायनों में अत्यधिक महत्वपूर्ण है. इसलिए खेतों में संतुलित व सही उर्वरक का उपयोग जरूरी है. कार्यक्रम में काफी संख्या में लोग उपस्थित थ्.

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