बुनियादी सुविधाओं से आज भी वंचित है पालकोट प्रखंड का ये पंचायत, न ही बिजली पहुंची, न सड़क, गांव का स्कूल भी बंद
Author : Prabhat Khabar News Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 21 Jun 2021 12:20 PM
मैंने इस बारे में अपने पंचायत के मुखिया को बताया है. लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं निकला. घुरन नगेसिया ने बताया कि हमारे गांव में आजादी के बाद आज तक बिजली नहीं आयी है. अभी भी हमलोग ढिबरी जला कर रह रहे हैं. बिजली विभाग के लोग गांव आये थे. सर्वे कर चल गये. लेकिन गांव में बिजली नहीं आयी. झलकू नगेसिया ने बताया कि हमारे गांव में एक नव प्राथमिक विद्यालय खुला था. हमारे बच्चे गांव के विद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे.
गुमला : पालकोट प्रखंड के नाथपुर पंचायत में भलमंडा गांव है. यह गांव आजादी के 73 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. गांव में आदिवासी जनजाति के 20 परिवार रहते हैं. गांव की आबादी 100 है. लेकिन आज तक गांव में न तो बिजली पहुंची और, न ही सड़क बनी. न तो पढ़ाई करने के लिए शिक्षा का केंद्र बना है. स्कूल था. उसे भी बंद कर दिया गया. बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी. इस संबंध में ग्रामीण बिल्ला नगेसिया ने बताया कि हमारे गांव में आने जाने के लिए सड़क नहीं है. बहुत मुश्किल से अपने गांव से दूसरे गांव जाने आने के लिए पगडंडी से सफर करते हैं. बरसात के दिनों में बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ता है.
मैंने इस बारे में अपने पंचायत के मुखिया को बताया है. लेकिन समस्या का कोई समाधान नहीं निकला. घुरन नगेसिया ने बताया कि हमारे गांव में आजादी के बाद आज तक बिजली नहीं आयी है. अभी भी हमलोग ढिबरी जला कर रह रहे हैं. बिजली विभाग के लोग गांव आये थे. सर्वे कर चल गये. लेकिन गांव में बिजली नहीं आयी. झलकू नगेसिया ने बताया कि हमारे गांव में एक नव प्राथमिक विद्यालय खुला था. हमारे बच्चे गांव के विद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे.
लेकिन सरकार की बिडंबना देखिये कि हमारे गांव का विद्यालय मर्ज हो गया. बच्चे पढ़ाई करने के लिए तरस रहे हैं. बगल के गांव में विद्यालय को शामिल कर दिया गया. बच्चे दो किमी होने के कारण उस गांव में पढ़ाई करने नहीं जाते हैं. विमला देवी ने बताया कि हमने अपने गांव के स्कूल को दूसरे जगह नहीं ले जाने की मांग की थी. लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गयी. जिसके कारण हमारे बच्चे पढ़ाईई लिखाई करने के लिए दूसरे जगह जा नहीं पा रहे हैं.
वृद्ध महिला चामिन खड़ियाइन ने बताया कि मैं जब से जानती हूं. मेरा गांव गढ़ाटोली से लौवाकेरा गांव आने के लिए सड़क नहीं बनी है. गांव के समीप नाला में पुलिया भी टूट गयॉी है. बड़ी मुश्किल से जान हथेली पर रखकर टूटे पुल से पार करते हैं.
Posted By : Sameer Oraon
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