बेटे के हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए दर-दर भटक रही मां, दो महीने बाद भी पुलिस के हाथ खाली

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Gumla News

गुमला के सदर थाने में आवेदन देने पहुंची पद्मा देवी. फोटो: प्रभात खबर

Gumla News: गुमला में गौरव सिंह हत्याकांड के दो महीने बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने पर मृतक की मां पदमा देवी न्याय के लिए भटक रही हैं. उन्होंने पुलिस से सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी, परिवार की सुरक्षा, सरकारी सहायता और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है.

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गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

Gumla News: झारखंड के गुमला जिले में एक बेटे की हत्या के दो महीने बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित परिवार न्याय के लिए भटकने को मजबूर है. मृतक गौरव सिंह की मां पदमा देवी लगातार थाना और प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन अब तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिला है. उनका आरोप है कि हत्या में शामिल नामजद और संदिग्ध आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि उनका परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन बिता रहा है.

न्याय की आस में थाने पहुंची पीड़ित मां

सदर थाना क्षेत्र के कोयनारा गांव निवासी पदमा देवी मंगलवार को अपनी शिकायत लेकर सदर थाना पहुंचीं. हालांकि पुलिस ने उन्हें यह कहते हुए पालकोट थाना भेज दिया कि इस मामले की प्राथमिकी वहीं दर्ज हुई है. पदमा देवी ने आवेदन में आरोप लगाया कि हत्या के इतने लंबे समय बाद भी पुलिस किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है. इससे परिवार का पुलिस और प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता जा रहा है.

मेला दिखाने के बहाने घर से ले गए थे युवक

आवेदन के अनुसार, पदमा देवी का पुत्र गौरव सिंह मजदूरी कर गोवा से अपने गांव लौटा था. एक जून की रात गांव के कुछ युवक उसे मेला दिखाने के बहाने अपने साथ ले गए. इसके बाद वह घर वापस नहीं लौटा. परिजनों ने पूरी रात उसकी तलाश की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला. अगले दिन सेमरा जंगल में एक पेड़ से उसका शव लटका हुआ मिला, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई.

हत्या कर शव लटकाने का आरोप

मृतक के परिजनों का आरोप है कि गौरव सिंह की पहले हत्या की गई और बाद में साक्ष्य मिटाने की नीयत से उसके शव को पेड़ पर लटका दिया गया, ताकि घटना आत्महत्या जैसी प्रतीत हो. परिवार का कहना है कि घटना के बाद से कुछ संदिग्ध गांव छोड़कर फरार हो गए हैं, जबकि अन्य नामजद आरोपी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं. इन सभी के नाम पुलिस को पहले ही उपलब्ध करा दिए गए हैं.

पहले भी मिल चुकी थी जान से मारने की धमकी

पदमा देवी ने अपने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि हत्या से पहले उनके बेटे और परिवार को कई बार जान से मारने की धमकी दी गई थी. इसके बावजूद समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. उनका कहना है कि यदि पुलिस पहले ही गंभीरता दिखाती तो शायद इस घटना को रोका जा सकता था.

परिवार में दहशत, सुरक्षा की मांग

मृतक की मां ने कहा कि बेटे की हत्या के बाद पूरा परिवार भय के साये में जी रहा है. उन्हें आशंका है कि आरोपी उनके परिवार के अन्य सदस्यों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं. उन्होंने प्रशासन से मृतक की विधवा पत्नी और एक वर्षीय पुत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. साथ ही परिवार को सरकारी सहायता राशि उपलब्ध कराने और सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भी अनुरोध किया है.

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आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग

पदमा देवी का कहना है कि वह लगातार न्याय की उम्मीद में पुलिस और प्रशासन के चक्कर लगा रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. उन्होंने पुलिस से हत्या के सभी आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है. इस मामले ने एक बार फिर हत्या के मामलों में समयबद्ध जांच और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब पीड़ित परिवार की निगाहें पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि आरोपियों की गिरफ्तारी हो और उन्हें न्याय मिल सके.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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