इसाई मिशनरियों का योगदान महत्वपूर्ण, फिर हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाया जा रहा : बिशप लीनुस पिंगल एक्का

Published by : VIKASH NATH Updated At : 17 Aug 2025 5:02 PM

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इसाई समुदाय के लोगों ने गुमला शहर में शांतिपूर्ण जुलूस निकाला, कचहरी परिसर में सभा की

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: दुर्ग में काथलिक धर्मबहनों व आदिवासी लड़का-लड़कियों पर धर्मांतरण व मानव तस्करी का आरोप लगा जेल में डालने का ऑल चर्चज कमेटी गुमला ने विरोध किया इसाई समुदाय के लोगों ने गुमला शहर में शांतिपूर्ण जुलूस निकाला, कचहरी परिसर में सभा की 17 गुम 3 में मंच पर बिशप, रेक्टर, पुरोहित सहित अन्य लोग 17 गुम 4 में कार्यक्रम में ख्रीस्त विश्वासी तख्ती लेकर बैठे हुए प्रतिनिधि, गुमला छत्तीसगढ़ राज्य के दुर्ग में साजिश के तहत दो काथलिक धर्मबहनों एवं चार आदिवासी लड़का व लड़कियों का जबरन धर्मांतरण व मानव तस्करी जैसी बेबुनियाद आरोप लगाकर उन्हें जेल में डालने के विरोध में ऑल चर्चेज कमेटी गुमला द्वारा रविवार को गुमला में विरोध प्रदर्शन किया गया. इसाई समुदाय के लोगों ने गुमला शहर में शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकाला और कचहरी परिसर गुमला में सभा किया. सभा में दुर्ग की घटना की निंदा की गयी. मौके पर गुमला धर्मप्रांत के बिशप लीनुस पिंगल एक्का ने कहा कि इसाई समुदाय का न केवल झारखंड, बल्कि पूरे भारत देश की शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा, आर्थिक, सांस्कृतिक, सामाजिक व राजनीतिक विकास में सदियों से महत्वपूर्ण योगदान रहा है. इसके बावजूद कई बार हमें विदेशी धर्मावलंबी व गैर आदिवासी जैसी बातें कहकर हमारी भावनाओं को ठेस पहुंचाया जाता है. हमारे और अन्य समुदायों के बीच वैमनस्यता उत्पन्न करने की कोशिश की जाती रही है. देश में इसाई अल्पसंख्यक समुदाय के लिए प्रदत्त संवैधानिक अधिकारों का खुल्लम-खुल्ला हनन किया जाता है. यहां तक कुछ असामाजिक संगठनों द्वारा हमारे धर्मगुरुओं तथा आम इसाई विश्वासियों को धर्म के नाम पर कई जगहों पर अत्याचार किया जाता है. दुर्ग की घटना की इसी प्रकार की घटना है. जहां दो काथलिक धर्मबहनों व चार आदिवासी लड़का व लड़कियों को एक महिला और उसके 50-60 समर्थकों द्वारा शारीरिक, मानसिक व मनोवैज्ञानिक ढंग से प्रताड़ित किया गया और उन्हें धर्म परिवर्तन कराने व मानव तस्करी में लिप्त होने जैसी बेबुनियाद आरोप लगाकर उन्हें जेल में डाल दिया गया. हालांकि एक सप्ताह पश्चात राजनीतिक दबाव में उन्हें जमानत दी गयी. लेकिन इस प्रकार की घटना निंदनीय है. ऐसी घटनाएं छत्तीसगढ़, ओडिशा, यूपी, असम, मध्यप्रदेश जैसे कई राज्यों में दिनोंदिन बढ़ रही है. जिस कारण झारखंड में हमारा इसाई समुदाय एक प्रकार के डर, भय, आतंक व आशंका के माहौल में जी रहा है. सरकार को इसपर रोक लगाने की आवश्यकता है. सभा को होशियाना तिर्की, प्रेमरोज कुजूर, सिस्टर फ्रीदा, फादर फ्लोरेंस कुजूर, रवि मिंज, सेतकुमार एक्का, आनंद कुमार पन्ना, ज्ञान प्रकाश, आनंद प्रकाश, अंतोनी लकड़ा, प्रोन एक्का, जोसेफ लकड़ा, फ्रांसिस गुप्त, सलीम टोप्पो, अलविस मिंज, सुधीर कुजूर, दीपक कुजूर, सुनील कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया. इस अवसर पर मंच का संचालन नीलम प्रकाश लकड़ा व सजीत पन्ना ने किया.

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