डुमरी. आरसी चर्च नवाडीह व रजावल चर्च में बुधवार को राख बुध पर्व मनाया गया. मुख्य अधिष्ठाता फादर ब्यातुस किंडो, फादर इलियास मिंज व सहयोगी के रूप में फादर पिंगल कुजूर, फादर देवनिश की अगुवाई में मिस्सा पूजा हुई. फादर ब्यातुस ने कहा कि राख बुध आज से हमलोग चालीसा काल में प्रवेश कर रहे हैं. इस चालीसा काल में तीन आध्यात्मिक प्रक्रिया हैं, जिसमें पहला दान देना, दूसरा प्रार्थना करना व तीसरा उपवास व परहेज हैं. यह आध्यात्मिक क्रिया है. यह तीनों प्रतिक्रिया मानव हृदय परिवर्तन की ओर ले जाता है. इसमें किसी प्रकार का तनिक दिखावा नहीं करना है और अहम नहीं रखना है. स्वयं में पूर्ण आध्यात्मिक रहना है. अपने सभी दैनिक कार्यों में बदलाव लाना पड़ता हैं. हम मन परिवर्तन की ओर अग्रसर हो सकते हैं. ईशा मसीह का उसमें हमलोग भाग ले सके. नये परिवर्तन में फल-फूल आते हैं. वैसे हम इन तीनों प्रक्रिया में हम नये ऋतु में प्रवेश करते हैं. इस करने के लिए सभी लोग पश्चाताप, क्षमा, प्रार्थना करते हैं. यह सभी वर्गों के लोगों के लिए है. इस चालीसा काल में जो नहीं कर सकते हैं. उसको कर दिखाना है. कहा कि बुरे विचार को त्यागने का समय है. अपने मन में बुरे विचार को इस काल में नहीं आने देना है. यह प्रक्रिया चलती रहेगी. हमलोग माथे पर राख लगाते है. उसका मतलब यह होता है कि यह शरीर नश्वर है, मिट्टी का बना हुआ है. एक दिन इसी मिट्टी में मिल जायेगा. इसको याद करते हुए माथे पर राख को लगाते हैं. मौके पर मुखिया प्रदीप मिंज, फादर अलोइस, फादर दोमनिक, सिस्टर वेरनासिया, सिस्टर ललिता, सिस्टर समीरा, सिस्टर रोजालिया, सचिन एक्का, रंजीत कुजूर, लिविन टोप्पो आदि मौजूद थे.
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