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सीएम हेमंत सोरेन भी लागू करवाना चाहते हैं सरना धर्म कोड, 5 विधायकों संग मुलाकात करने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल से कही ये बात

Updated at : 27 Oct 2020 4:54 PM (IST)
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सीएम हेमंत सोरेन भी लागू करवाना चाहते हैं सरना धर्म कोड, 5 विधायकों संग मुलाकात करने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल से कही ये बात

Jharkhand news, Gumla news : झारखंड के 5 विधायकों ने सरना धर्म कोड की मांग की है. इस संबंध में झारखंड मुक्ति मोर्चा की केंद्रीय समिति के सदस्यों ने गुमला विधायक भूषण तिर्की के नेतृत्व में 5 विधायकों के साथ 2 पूर्व विधायक एवं झामुमो के जिलाध्यक्षों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है. विधायकों ने कहा है कि आदिवासियों की मांग जायज है. इसपर किसी प्रकार की राजनीति नहीं करते हुए सरना धर्म कोड लागू करना चाहिए. इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की मांग की गयी. इसपर सीएम हेमंत सोरेन ने कहा है कि मैं खुद सरना कोड लागू करने का पक्षधर हूं. आदिवासी सरना धर्म कोड बिल पारित कर प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जायेगा.

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Jharkhand news, Gumla news : गुमला (दुर्जय पासवान) : झारखंड के 5 विधायकों ने सरना धर्म कोड की मांग की है. इस संबंध में झारखंड मुक्ति मोर्चा की केंद्रीय समिति के सदस्यों ने गुमला विधायक भूषण तिर्की के नेतृत्व में 5 विधायकों के साथ 2 पूर्व विधायक एवं झामुमो के जिलाध्यक्षों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा है. विधायकों ने कहा है कि आदिवासियों की मांग जायज है. इसपर किसी प्रकार की राजनीति नहीं करते हुए सरना धर्म कोड लागू करना चाहिए. इसके लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजने की मांग की गयी. इसपर सीएम हेमंत सोरेन ने कहा है कि मैं खुद सरना कोड लागू करने का पक्षधर हूं. आदिवासी सरना धर्म कोड बिल पारित कर प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जायेगा.

आदिवासियों का अलग धर्म कोड की मांग जायज : विधायक

गुमला विधायक भूषण तिर्की ने कहा है कि झारखंड प्रदेश आदिवासी बहुल राज्य है. यहां की एक बड़ी आबादी सरना धर्म को मानने वाली है. सरना धर्म को मानने वाले लोग प्राचीन परंपराओं एवं प्रकृति के उपासक हैं. मालूम हो कि सभी धर्मों को संवैधानिक मान्यता मिल चुकी है, लेकिन सरना धर्म को नहीं मिला है. जिसके कारण आज तक आदिवासियों का धार्मिक एवं सामाजिक शोषण होता आ रहा है.

उन्होंने कहा कि प्राचीनतम सरना धर्म का जीता- जागता ग्रंथ जल, जंगल, जमीन एवं प्रकृति है. सन 1871 से 1951 तक की जनगणना में आदिवासियों का अलग धर्म कोड था. लेकिन, एक सोची- समझी चाल के तहत वर्ष 1961- 62 के जनगणना प्रपत्र से इसे हटा दिया गया. वर्ष 2011 के जनगणना में देश के 21 राज्यों में रहने वाले लगभग 50 लाख आदिवासियों ने जनगणना प्रपत्र में सरना धर्म लिखा.

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झारखंड में सरना धर्म को मानने वाले लोग वर्षों से सरना धर्म कोड लागू करने के लिए आंदोलन करते आ रहे हैं. इस संबंध में कई संगठनों के लोगों ने ज्ञापन भी सौंपा है. अब समय आ गया है कि सरना धर्म कोड को लागू करने की दिशा में सरकार ठोस कदम उठाये. सरना धर्म की संस्कृति, पूजा पद्धति, आदर्श एवं मान्यताएं प्रचलित सभी धर्मों से अलग है.

आदिवासी समाज प्रकृति के पुजारी हैं. पेड़ों, पहाड़ों की पूजा तथा जंगलों को संरक्षण देने को ही ये अपना धर्म मानते हैं. आज पूरा विश्व बढ़ते प्रदूषण एवं पर्यावरण की रक्षा को लेकर चिंतित हैं. वैसे समय में जिस धर्म की आत्मा प्रकृति एवं पर्यावरण की रक्षा है उसको मान्यता मिलने से भारत ही नहीं पूरे विश्व में प्रकृति प्रेम का संदेश फैलेगा.

उन्होंने कहा कि झारखंड मुक्ति मोरचा पार्टी सरकार से मांग करती है कि झारखंड के बहुसंख्यक जन अकांक्षा को ध्यान में रखते हुए शीघ्र विधानसभा का विशेष सत्र आहूत कर सरना धर्म कोड बिल पारित कराकर केंद्र सरकार को भेजा जाये. जिससे वर्ष 2021 जनगणना प्रपत्र में सरना धर्म कोड अंकित करने का प्रावधान केंद्र सरकार करने को बाध्य हो जाये. मौके पर विधायक भूषण तिर्की, विधायक दीपक बिरूआ, मंगल कालिंदी, संजीव सरदार, विकास मुंडा, योगेंद्र प्रसाद, पूर्व विधायक अमित कुमार, रामगढ़ के झामुमो जिला अध्यक्ष विनोद किस्कू, बोकारो के जिला अध्यक्ष हीरालाल हांसदा मौजूद थे.

Posted By : Samir Ranjan.

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